नेपाल जलप्रलय से सुरक्षित लौटे ज्ञान सिंह दो दिन पहाड़ी पर बिताए, हेलीकॉप्टर से हुआ रेस्क्यू
मंडी, 04 सितंबर (हि.स.)। नेपाल की आई त्रासदी को मंडी जिले के उपमंडल सुंदरनगर के गांव मलोह का ज्ञान चंद ने भी झेला और देखा। सौभाग्य यह रहा कि किसी तरह ज्ञान चंद ने अपने को बचाया और बचाव दलों की मदद से सकुशल लौट आया। नेपाल की त्रिशूली नदी पर आई भीषण जलप्रलय से सुरक्षित लौटे ज्ञान सिंह जब उस खौफनाक मंजर को याद करते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं और गला भर आता है।
उन्हाेने बताया कि 26 अगस्त को ड्यूटी के दौरान अचानक आए जल सैलाब ने देखते ही देखते पूरी परियोजना को अपनी चपेट में ले लिया। दो दिन तक पहाड़ी पर जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद सेना और हेलीकॉप्टर रेस्क्यू की मदद से ज्ञान सिंह एक सितंबर को सकुशल अपने घर मलोह पहुंचे।
ज्ञान सिंह पिछले 23 वर्षों से जल विद्युत परियोजनाओं में सेवाएं दे रहे हैं। करीब आठ महीने पहले वह हिमाचल के चंबा में कार्यरत जल विद्युत निर्माण कंपनी में कार्य करने उपरान्त स्टाफ सहित नेपाल की त्रिशूली नदी पर स्थित 126 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना में काम करने गए थे।
उन्होंने बताया कि 26 अगस्त की सुबह करीब साढ़े छह बजे उन्होंने रोजाना की तरह घर फोन किया था। परिवार को ड्यूटी पर जाने की बात कहने के करीब तीन घंटे बाद ही ऐसा हादसा हुआ, जिसने उनकी जिंदगी की सबसे भयावह याद छोड़ दी। सुबह करीब साढ़े नौ बजे वह परियोजना स्थल पर अन्य कर्मचारियों के साथ निर्माण कार्य कर रहे थे। अचानक तेज हवाओं के झोंके के साथ परियोजना के गेटों से जोरदार आवाज के साथ मिट्टी पत्थर पानी का जलजला आ गया। कुछ समझ पाते, इससे पहले ही चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा। ज्ञान सिंह ने किसी तरह खुद को सुरक्षित किया और आसपास काम कर रहे लोगों को भी तुरंत वहां से निकलकर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा।
उन्होंने बताया कि करीब 110 लोग इस जल प्रलय के दौरान सुरक्षित बच पाए, जबकि उनका एक साथी पानी के तेज बहाव में बह गया। वहीं परियोजना क्षेत्र में करीब 98 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा