डीएसपी के जातीय उत्पीड़न के आरोपों पर एससी आयोग की सख्ती, एसीएस गृह और डीजीपी को किया दिल्ली तलब
शिमला, 14 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीएसपी (मुख्यालय) विजय कुमार रघुवंशी की ओर से लगाए गए जातीय उत्पीड़न के आरोपों का मामला और गरमा गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने मामले को महज शिकायत तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को 20 अगस्त को नई दिल्ली में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग की ओर से 14 अगस्त को जारी सुनवाई नोटिस ने इस मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
आयोग ने मांगे रिकॉर्ड और कार्रवाई की पूरी जानकारी
आयोग के नोटिस के अनुसार सदस्य डॉ. पार्थ बिस्वास 20 अगस्त को दोपहर 12 बजे लोकनायक भवन स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के मुख्यालय में मामले की सुनवाई करेंगे। एसीएस गृह और डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं कि वे मामले से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज, केस रिकॉर्ड, फाइलें और अब तक की गई कार्रवाई की ताजा रिपोर्ट अपने साथ लेकर आएं। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि शिकायतकर्ता डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी को भी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के लिए कहा जा सकता है।
सरकारी गाड़ी विवाद से शुरू हुआ था मामला
यह विवाद उस समय सामने आया था जब डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी की सरकारी गाड़ी वापस लेने का मामला चर्चा में आया था। रघुवंशी ने आरोप लगाया था कि उनके साथ जाति के आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया और उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित किया गया। शिकायत में कहा गया था कि एक पुलिस अधिकारी को लिफ्ट देने की घटना के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके बाद उन्होंने 3 जून 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने इसे जाति आधारित उत्पीड़न का मामला बताया था।
पहले नोटिस, अब आमने-सामने सुनवाई
शिकायत मिलने के बाद आयोग ने 30 जून 2026 को तत्कालीन कार्यवाहक डीजीपी अशोक तिवारी को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी थी। अब आयोग ने मामले को अगले चरण में ले जाते हुए औपचारिक सुनवाई तय कर दी है। आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्राप्त अधिकारों के आधार पर मामले की जांच कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा