नौतोड़ के 20 हजार मामले लंबित, भाजपा के दबाव में राज्यपाल नहीं दे रहे मंजूरी : केसर नेगी
शिमला, 29 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य केसर नेगी ने नौतोड़ भूमि के लंबित मामलों को लेकर राज्यपाल और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि किन्नौर में ही नौतोड़ के करीब 20 हजार मामले लंबित हैं। उनके अनुसार जनजातीय क्षेत्रों में 20 बीघा से कम भूमि रखने वाले लोगों को नौतोड़ के तहत जमीन देने का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में वन संरक्षण कानून से जुड़ी मंजूरी अहम है।
शिमला में मंगलवार को पत्रकार वार्ता में केसर नेगी ने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव के कारण राज्यपाल नौतोड़ मामलों को मंजूरी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के मंत्री जगत सिंह नेगी 2023 से अब तक अलग-अलग राज्यपालों से करीब दस बार मिल चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि 28 अगस्त 2026 को भी जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल से मुलाकात कर यह मामला उठाया था।
केसर नेगी ने कहा कि किन्नौर के अलावा लाहौल-स्पीति, पांगी और भरमौर में भी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। उन्होंने दावा किया कि किन्नौर के करीब साढ़े छह हजार मामलों का संयुक्त निरीक्षण हो चुका है। उनके अनुसार नौतोड़ के लिए पात्र व्यक्ति को 20 बीघा तक जमीन देने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि नौतोड़ के मुद्दे पर कांग्रेस की पदयात्रा 11 सितम्बर को किन्नौर के सीमावर्ती गांव सुमरा से शुरू हुई थी। यात्रा किन्नौर और लाहौल-स्पीति में चल चुकी है। इसके बाद पांगी और भरमौर के जनजातीय क्षेत्रों में यात्रा जाएगी।
केसर नेगी ने कहा कि यात्रा के बाद तीनों जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिनिधि शिमला पहुंचेंगे। महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मौन प्रदर्शन के बाद राजभवन जाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो राजभवन के बाहर धरना और भूख हड़ताल भी की जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि पूर्व में नौतोड़ के लिए वन संरक्षण कानून में छूट देकर सैकड़ों पट्टे जारी किए गए थे। वर्ष 2016-17 में 551 किसानों को पट्टे मिलने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के समय वर्ष 2019 में भी एक साल की छूट दी गई थी, मगर उस दौरान केवल एक पट्टा मिला।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा