शिमला में विकसित भारत 2047 पर राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू, विकास के विभिन्न पहलुओं पर मंथन
शिमला, 27 अप्रैल (हि.स.)। शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) में सोमवार से विकसित भारत 2047: चुनौतियाँ और अवसर विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत हुई। इस संगोष्ठी का उद्देश्य देश के समग्र, समावेशी और सतत विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में बौद्धिक योगदान देना है।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में संयोजक और महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने विकसित भारत 2047 की अवधारणा को शासन, शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक समावेशन और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों से जोड़ते हुए विस्तार से समझाया।
मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. आर. के. मिश्रा ने भारत के विकास पथ से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतियों के बेहतर समन्वय की जरूरत है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक प्रगति का लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसमें सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिक परंपरा और सामाजिक समरसता भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक संस्थान बहु-विषयी संवाद और शोध के माध्यम से इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
उद्घाटन सत्र में संस्थान के सचिव मेहर चंद नेगी ने स्वागत भाषण दिया, जबकि कार्यक्रम का संचालन जन संपर्क अधिकारी डॉ. अखिलेश पाठक ने किया और अंत में धन्यवाद प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया।
संगोष्ठी के आगामी सत्रों में विकसित भारत की आधारभूत अवधारणा: प्रधानमंत्री की दृष्टि समेत कई विषयों पर चर्चा होगी। इनमें आर्थिक परिदृश्य, शिक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता, शासन और नीतिगत मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। दूसरे दिन नीति और प्रशासन, भारतीय चिंतन की पारंपरिक दृष्टि और विकसित भारत के समग्र विजन पर चर्चा प्रस्तावित है।
इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविद और विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। इनमें गुजरात विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीरजा गुप्ता, गोवा के कर्मेल कॉलेज फॉर वुमेन के प्रो. मनोज बोरकर, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. सुषमा यादव, ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रो. पंकज गुप्ता, कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन के निदेशक प्रो. पी. एस. मनहास और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रो. विवेकानंद तिवारी सहित कई विद्वान शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों और विश्वविद्यालयों से जुड़े विशेषज्ञ भी अपने विचार साझा कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा