सुपरस्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में जुटे विशेषज्ञ, एमएस मरीजों को दिए बेहतर जीवन के मंत्र
शिमला, 20 जून (हि.स.)। मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) जैसी जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे मरीजों को बेहतर जानकारी, उपचार और मानसिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को शिमला के चमियाना स्थित अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज (एआईएमएसएस) में “आर्ट ऑफ लिविंग विद एमएस” विषय पर पांचवां फाउंडेशन डे और मल्टीपल स्क्लेरोसिस सपोर्ट मीट आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों, स्वास्थ्य पेशेवरों और एमएस से प्रभावित 15 मरीजों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में योगदा सत्संग सोसाइटी के वरिष्ठ संन्यासी स्वामी कृष्णानंद ने ध्यान और योग के वैज्ञानिक पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि ध्यान और योग को लेकर दुनिया भर में कई वैज्ञानिक शोध हुए हैं और अब इनके सकारात्मक प्रभावों को वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से भी प्रमाणित किया जा रहा है। उन्होंने मानसिक शांति, तनाव प्रबंधन और बेहतर स्वास्थ्य के लिए ध्यान के महत्व पर जोर दिया।
इस दौरान दिनभर विभिन्न विशेषज्ञों के सत्र आयोजित किए गए, जिनमें मल्टीपल स्क्लेरोसिस के इलाज, देखभाल और जीवनशैली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। डॉ. अमित भारद्वाज (डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज, टांडा), डॉ. धीरज खुराना (पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़), डॉ. आशीष शर्मा (एम्स बिलासपुर), फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अंकुश (आईजीएमसी शिमला) और डॉ. देवेश (आईजीएमसी शिमला) ने मरीजों और उनके परिजनों को बीमारी के प्रबंधन, आधुनिक उपचार पद्धतियों, पुनर्वास और नियमित देखभाल के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा “लिविंग फुली डेस्पाइट एमएस” विषय पर आयोजित संवाद सत्र रहा, जिसमें डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के डॉ. नीरज शर्मा ने मल्टीपल स्क्लेरोसिस से जूझ रहे लोगों की प्रेरणादायक कहानियां साझा कीं। इस दौरान यह संदेश दिया गया कि बीमारी के बावजूद सही उपचार, सकारात्मक सोच और सामाजिक सहयोग के सहारे सामान्य और सक्रिय जीवन जियाo जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में खुला पैनल चर्चा और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें मरीजों और उनके देखभालकर्ताओं ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
चमियाना सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के एमएस डॉक्टर सुधीर शर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चिकित्सा संबंधी जानकारी देना नहीं था, बल्कि मरीजों को भावनात्मक और सामाजिक सहयोग भी उपलब्ध कराना था।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा