भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार और संरक्षण किसी धर्म-संप्रदाय के ख़िलाफ़ नहीं : अनुराग सिंह ठाकुर

 


मंडी, 10 मई (हि.स.)। पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद रविवार काे अनुराग सिंह ठाकुर मंडी जिला के बल्ह में श्री राधामाधव मंदिर एवं मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने ब्रह्मलीन युगपुरुष श्री श्री 1008 बाबा कल्याणदास कालेबाबा को स्मरण कर बाबा कमलदास जी महाराज के सानिध्य में उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बल देने में सनातनियों की एकजुटता की वकालत की।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि एक सनातनी और सामान्य व्यक्ति के रूप में मेरा मानना है कि आज हम सनातनियों को एकजुट होने की जरूरत है। हमें सनातन के उन महान परंपराओं को समझना पड़ेगा और उसे अपने जीवन में उतारने की जरूरत भी है। हमारे मंदिर, हमारे तीर्थ, हमारे धर्म स्थल हमारे संस्कृति के आधार हैं। मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं होते, यह हमारे संस्कृति, सभ्यता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक एकता के केंद्र होते हैं ।

उन्होंने कहा कि आज हमारे मंदिरों के माध्यम से सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के अनेक काम हो रहे हैं। हम सनातनियों से अधिक मंदिर का मर्म और कौन समझेगा, लगभग 500 साल पहले बाबर ने रामलला के मंदिर को तोड़ा थ । दरबारी इतिहासकारों ने इसे दबाने की कोशिश की झुठलाने की कोशिश की लेकिन हम भूले नहीं, हमने 500 सालों तक रामलला के गर्भगृह पर अधिकार पाने के लिए संघर्ष किया और आज उस जगह भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार है।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि राजनीति की हो या लोककल्याण या फिर हमारे सामाजिक जीवन की, हमारा चैतन्य होना सबसे अधिक जरुरी है। आज के युवा पहले से कहीं अधिक सनातन धर्म, परंपरा, संस्कृति इसके मूल्यों और आदर्शों की तरह आकर्षित हो रहे हैं यह एक सुखद अनुभूति है । इसलिए जब हम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बात करते हैं, भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार और संरक्षण की बात करते हैं तो हम किसी धर्म संप्रदाय की नहीं भारत संस्कृति की बात करते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा