शिक्षकों के लिये तबादला नीति और निश्चित कार्यकाल तय करना जरूरी : रोहित ठाकुर
शिमला, 12 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की ट्रांसफर पॉलिसी बनाना और उनका निश्चित कार्यकाल तय करना जरूरी है। जब तक शिक्षक का कार्यकाल तय नहीं होगा, तब तक शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार लाना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और किसी भी शिक्षा प्रणाली की सफलता अच्छे तथा प्रतिबद्ध शिक्षकों पर निर्भर करती है।
रोहित ठाकुर ने शनिवार को कहा कि चाहे सीबीएसई हो, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड हो या अटल और राजीव गांधी आदर्श विद्यालय, हर व्यवस्था में शिक्षकों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। शिक्षकों की नियुक्ति मेरिट के आधार पर होने के साथ उनकी तैनाती और तबादलों में भी पारदर्शिता होनी चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि योग्य शिक्षक लंबे समय तक एक ही स्थान पर सेवाएं दे सकें। इससे छात्रों की पढ़ाई बार-बार शिक्षक बदलने से प्रभावित नहीं होगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हर साल नई भर्ती से शिक्षा विभाग में नया और योग्य मानव संसाधन आएगा। उन्होंने हाल में सीबीएसई के माध्यम से की गई शिक्षकों की नियुक्ति को सकारात्मक कदम बताया। उनका कहना था कि शिक्षकों की भर्ती, तैनाती और कार्यकाल को लेकर स्पष्ट व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी।
15 वर्षों में सरकारी स्कूलों में करीब चार लाख छात्र घटे
रोहित ठाकुर ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में लगभग चार लाख की कमी आई है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें समय के अनुसार शिक्षा व्यवस्था में बदलाव न होना भी एक कारण है। उन्होंने कहा कि अब स्कूलों और कॉलेजों को लोगों की बदलती जरूरतों और रोजगार की मांग के अनुसार तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि आने वाले समय में उद्योगों में किन क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर होंगे। इसके बाद उसी जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। शिक्षा को रोजगार से जोड़ना समय की आवश्यकता है। छात्रों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उन्हें आगे की पढ़ाई के साथ रोजगार की बदलती जरूरतों के लिए भी तैयार करे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में शिक्षक-छात्र अनुपात देश के मुकाबले बेहतर है। राज्य में औसतन 10 छात्रों पर एक शिक्षक है, जबकि लाहौल-स्पीति में यह अनुपात तीन छात्रों पर एक शिक्षक का है। इसके बावजूद कुछ दुर्गम क्षेत्रों में अभी भी शिक्षकों और अन्य स्टाफ की कमी बनी हुई है। इन क्षेत्रों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
प्राथमिक शिक्षकों के आंदोलन पर सरकार कर रही मंथन
प्राथमिक शिक्षक संघ के आंदोलन को लेकर रोहित ठाकुर ने कहा कि सरकार शिक्षकों की मांगों और सुझावों पर मंथन कर रही है। मुख्यमंत्री ने भी इस विषय में बातचीत की है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की ओर से आने वाले सकारात्मक सुझावों का सरकार स्वागत करेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शिक्षक का पद समाप्त नहीं किया जाएगा और शिक्षकों के पदोन्नति के अवसर भी खत्म नहीं होंगे। सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार कर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा