शिमला नगर निगम की बैठक में मेयर के कार्यकाल पर हंगामा, भाजपा ने किया बहिष्कार

 

शिमला, 27 फ़रवरी (हि.स.)। शिमला नगर निगम की मासिक बैठक शुक्रवार को मेयर के कार्यकाल को लेकर भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक शुरू होने से पहले ही भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक और नारेबाजी शुरू हो गई। भाजपा पार्षदों ने मेयर के पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाते हुए सदन की कार्यवाही पर आपत्ति जताई।

भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने वाले विधेयक पर अभी तक राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, ऐसे में मेयर किस अधिकार से सदन का संचालन कर रहे हैं। इस मुद्दे पर दोनों दलों के पार्षद आमने-सामने आ गए और सदन में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। बढ़ते विरोध के बीच भाजपा पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।

कुछ देर बाद मेयर ने कांग्रेस पार्षदों के साथ फिर से बैठक शुरू करने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने दोबारा विरोध शुरू कर दिया। भाजपा पार्षदों ने कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया और मेयर के खिलाफ नारेबाजी की। हंगामे के दौरान मेयर भी नाराज नजर आए और कृष्णानगर के पार्षद बिट्टू पन्ना को निलंबित करने की चेतावनी दी। इसके बाद भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।

भाजपा पार्षदों का कहना है कि मेयर को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उनका आरोप है कि ढाई साल बाद रोस्टर के अनुसार मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होना था, लेकिन मौजूदा मेयर पद पर बने हुए हैं। भाजपा ने यह भी कहा कि मेयर के पास पार्षदों को निलंबित करने का अधिकार नहीं है।

उधर, इस पूरे विवाद पर कानूनी लड़ाई भी जारी है। मेयर के कार्यकाल बढ़ाने के मामले में अदालत में अगली सुनवाई 2 मार्च को तय है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से मेयर की नियुक्ति तुरंत रद्द करने की मांग की गई है। बताया गया है कि सरकार ने मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल करने के लिए जो अध्यादेश राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा था, उसकी समय सीमा 6 जनवरी को समाप्त हो चुकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा