महिला मंडल ने बनाया अपना भवन, साथ लगते जंगल को बदल दिया देवदार के जंगल में

 


मंडी, 08 अगस्त (हि.स.)। मंडी जिला के सराज क्षेत्र की सरोआ पंचायत के चलोग महिला मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल कायम की है। महिला शक्ति जब करने में आ जाए तो वो कुछ भी करने में सक्षम है। वर्ष 2002 में गठित महिला मंडल चलोग मात्र पांच रुपए प्रति महिला सहयोग राशि रखी गई थी। महिला मंडल के शुरुआत में केवल 19 सदस्य बने और आज 41 सदस्य पंजीकृत हुए हैं। जबकि 35 हज़ार रुपए सदस्याता के रूप में महिला मंडल के बैंक खाते में जमा हो चुका है।

महिला मंडल ने साथ लगते मझाण जंगल को गोद ले कर उसकी सुरक्षा और संवर्धन का जिम्मा लिया। इस कार्य में वन विभाग भी सहयोग देता है। महिलाओं ने सबसे पहले इस जंगल को चीड़ से मुक्त करने का बीड़ा उठाया। इसलिए हर साल 50-100 पौधे देवदार तथा पशुओ के चारे के लिए चौड़ी पत्ती के पौधे लगाए जा रहे हैं। वन विभाग ने महिलाओं की वनों के प्रति सकारात्मक सोच को देखते हुए इन्हें समय-समय पर फ्री पौधे और अन्य सुविधाएं दी गई।

वन मंडल अधिकारी ने नाचन सुरेंद्र कश्यप द्वारा वर्ष 2025 और 2026 में महिला मंडल को 10-10 हज़ार की आर्थिक सहायता प्रदान की है। जिससे महिलाओं के उत्साह में वृद्धि हुई। इतना ही नहीं इन महिलाओं ने सरकार के सहयोग और अपने परिश्रम से दो मंजिले भवन का निर्माण भी किया है। महिला मंडल भवन परिसर के साथ वाली ज़मीन पर 60 पौधे देवदार के लगाए, जो अब बड़े हो रहे हैं। इसके अलावा भवन के साथ लगते जंगल में हर साल पौधरोपण कर देवदार और चौड़ी पत्ती के पौधे लगाए जा रहे हैं। जिससे पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्रयास जारी है।

महिला मंडल की महिलाओं के जज्बे और परिश्रम को देखकर वन मंडलाधिकारी नाचन सुरेंद्र कश्यप का कहना है कि पर्यावरण के प्रति महिलाओं की सोच सकारात्मक है। वनों के संरक्षण के लिए महिलाएं सदैव आगे रहती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा