भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथयात्रा के साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का आगाज, देवभूमि में उमड़ा आस्था का सैलाब

 


कुल्लू, 21 अक्टूबर (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2026 का बुधवार को भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथयात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में आयोजित देव महाकुंभ में सैकड़ों देवी-देवताओं की उपस्थिति और हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया। भगवान रघुनाथ जी के जयघोषों से कुल्लू घाटी गूंज उठी और पूरा ढालपुर मैदान देव संस्कृति, आस्था और श्रद्धा के रंगों में रंग गया।

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में सप्ताह भर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। उत्सव का आगाज भगवान रघुनाथ जी की पारंपरिक रथयात्रा के साथ हुआ, जिसमें कुल्लू घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से आए 347 से अधिक देवी-देवताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उपस्थित रहीं।

राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। देव संस्कृति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम इस उत्सव को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि परंपराओं का संरक्षण और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

रथयात्रा से पहले सुल्तानपुर स्थित भगवान रघुनाथ जी के मंदिर में देवी-देवताओं ने शीश नवाया। इसके बाद कुल्लू राज परिवार की राज्य दात्री माता हिडिंबा देवी के राजमहल पहुंचने पर पारंपरिक रस्में निभाई गईं। भगवान रघुनाथ जी को पालकी में विराजमान कर रथ मैदान तक लाया गया, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रथयात्रा शुरू हुई।

रंग-बिरंगे परिधानों और सोने-चांदी के आभूषणों से सुसज्जित रथ में भगवान रघुनाथ जी, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमाएं विराजमान की गईं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर अपनी आस्था प्रकट की।

सात दिन तक चलेगा देव महाकुंभ

कुल्लू दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान रघुनाथ जी की अगुवाई में सात दिवसीय उत्सव की धार्मिक परंपराएं निभाई जाएंगी। पहले दिन भगवान रघुनाथ जी को उनके अस्थायी शिविर में विराजमान किया गया, जबकि अन्य देवी-देवता अपने-अपने शिविरों में पहुंचे। अगले सात दिनों तक श्रद्धालु भगवान रघुनाथ जी के दरबार में दर्शन करेंगे और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे।

उत्सव के दौरान प्रतिदिन रघुनाथ जी के शिविर में चंद्राउली का आयोजन होगा। राजा की जलेब भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। छठे दिन मुहल्ले की परंपरा निभाई जाएगी, जबकि सातवें दिन लंका दहन के साथ प्रमुख धार्मिक परंपराओं का समापन होगा।

देश-विदेश के पर्यटकों में उत्साह

रथयात्रा में शामिल होने के लिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। देश-विदेश से आए पर्यटकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भी इस अनूठी देव परंपरा को करीब से देखा। उत्सव के दौरान देव संस्कृति, लोक परंपराओं और अंतरराष्ट्रीय लोकनृत्यों की झलक देखने को मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / जसपाल सिंह