केएनएच शिफ्टिंग के विरोध में 15 सितंबर को सचिवालय मार्च करेगी जनवादी महिला समिति

 

शिमला, 12 सितंबर (हि.स.)। राजधानी शिमला के कमला नेहरू महिला एवं शिशु अस्पताल (केएनएच) को इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में शिफ्ट करने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एआईडीडब्ल्यूए) ने इस निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए 15 सितंबर को सचिवालय तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। समिति के अनुसार ये मार्च टालेंड से शुरू होगा। समिति ने आम लोगों से भी इसमें बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

समिति के पदाधिकारियों ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार एक रोबोटिक सर्जरी सुविधा के नाम पर वर्षों से संचालित केएनएच की व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। समिति का कहना है कि केएनएच महिलाओं और बच्चों के उपचार के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण अस्पताल रहा है। यहां उपलब्ध सुविधाओं को बनाए रखने और उनका विस्तार करने की जरूरत है। समिति ने कहा कि वह इस मामले को सड़क से लेकर न्यायालय तक उठाएगी। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

समिति की पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि आईजीएमसी पहले से ही मरीजों के दबाव से जूझ रहा है। ऐसे में केएनएच के विभागों को वहां शिफ्ट करने से मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उनका कहना है कि केएनएच में पहले महिलाओं और बच्चों को कई उपचार और दवाएं निशुल्क मिलती थीं, जबकि अब कुछ सेवाओं के लिए मरीजों को भुगतान करना पड़ रहा है। समिति ने यह भी कहा कि केएनएच के विभागों को आईजीएमसी में ले जाने से प्रशिक्षु डॉक्टरों की पढ़ाई और प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है।

जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट, सचिव फालमा चौहान और सचिवालय सदस्य सुनिधि चौहान ने पत्रकार वार्ता में सरकार के इस निर्णय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले रहे मुख्यमंत्रियों ने केएनएच की सुविधाओं में सुधार और विस्तार के लिए काम किया। समिति के नेताओं का आरोप है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था को बांटने और कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केएनएच को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

समिति के नेताओं ने केएनएच को आईजीएमसी में शिफ्ट करने के लिए गठित कमेटी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कमेटी में शामिल अस्पताल की प्रधानाचार्य, स्त्री रोग विभाग की प्रमुख और चिकित्सा शिक्षा निदेशक सभी विस्तार अवधि पर कार्यरत हैं और जनहित के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। समिति ने इन आरोपों के समर्थन में कोई अलग दस्तावेज पत्रकार वार्ता में प्रस्तुत किया या नहीं, इसकी जानकारी नहीं दी गई। एआईडीडब्ल्यूए ने कहा कि आईजीएमसी का मौजूदा वातावरण गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के उपचार के लिए उपयुक्त नहीं है।

समिति की सचिव फालमा चौहान ने कहा कि केएनएच को बचाने के लिए समिति ने हस्ताक्षर अभियान चलाया है। उनके अनुसार इस अभियान में एक लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर अस्पताल को शिफ्ट करने के निर्णय का विरोध दर्ज कराया है। समिति इन हस्ताक्षरों को ज्ञापन के साथ सरकार को सौंपेगी। उन्होंने लोगों से 15 सितंबर के सचिवालय मार्च में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यदि सरकार महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना चाहती है तो केएनएच परिसर में ही आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

सचिवालय सदस्य सुनिधि चौहान ने 16 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि उस बैठक में आईजीएमसी में स्त्री रोग विभाग की रोबोटिक सर्जरी के लिए 50 बिस्तर उपलब्ध कराने पर सहमति बनी थी। उनका आरोप है कि बाद में पूरे स्त्री रोग वार्ड को ही आईजीएमसी शिफ्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि समिति इस निर्णय को कुछ लोगों के निजी हितों से जुड़ा मानती है। उनके अनुसार आईजीएमसी में मरीजों को उपचार के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और कई सेवाओं के लिए भुगतान करना पड़ रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा