किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों का एमओयू, हिमाचल पर दो हज़ार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा
शिमला, 15 सितंबर (हि.स.)। किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर आठ साल से चला आ रहा वित्तीय गतिरोध अब खत्म हो गया है। हिमाचल प्रदेश समेत छह राज्यों ने 422 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए मंगलवार को नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। हिमाचल सरकार के अनुसार इस समझौते में प्रदेश के हितों को सुरक्षित करते हुए बिजली घटक की करीब दो हज़ार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का बोझ हिमाचल पर नहीं पड़ेगा। इस राशि को परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टौंस नदी पर बनने वाली किशाऊ परियोजना की अनुमानित लागत 15,624 करोड़ रुपये है।
एमओयू पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि 16 जून को केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति दी थी कि बिजली घटक पर हिमाचल के हिस्से में आने वाली करीब दो हज़ार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा वहन करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए इस मामले को केंद्र के समक्ष मजबूती से उठाया था। पिछली सरकार ने हिमाचल की ओर से 800 करोड़ रुपये की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल सरकार का तर्क था कि परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र 90 प्रतिशत अनुदान दे रहा है, ऐसे में बिजली घटक के लिए भी हिमाचल पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं है। परियोजना के कारण प्रदेश के संबंधित क्षेत्र की आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा और मुख्यमंत्री के अनुसार परियोजना से हिमाचल को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में हिमाचल के योगदान की समुचित भरपाई होनी चाहिए और राज्य के सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश को हर साल एक हज़ार मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। परियोजना के निर्माण के बाद प्रदेश को सालाना एक हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना में राज्य के वैध अधिकार और उचित हिस्सेदारी सुरक्षित करना हिमाचल के हितों की रक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा