हिमाचल में आस्था यात्राओं पर मौसम की मार, श्रीखंड महादेव यात्रा के बाद किन्नर कैलाश यात्रा भी स्थगित

 

शिमला, 28 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष दो प्रमुख धार्मिक यात्राओं किन्नर कैलाश यात्रा और श्रीखंड महादेव यात्रा पर प्राकृतिक खतरों का साया पड़ गया है। यात्रा मार्गों पर ग्लेशियर, अस्थिर चट्टानों, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासनों ने दोनों यात्राओं को अगली सूचना तक स्थगित करने का फैसला लिया है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

किन्नौर में किन्नर कैलाश यात्रा-2026 का आयोजन 1 जुलाई से 30 जुलाई तक प्रस्तावित था। 12 जून को राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यात्रा कराने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद हर वर्ष की तरह यात्रा मार्ग की सुरक्षा का आकलन करने के लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में एक विशेष रैकी दल का गठन किया गया। इसे 21 जून को निरीक्षण के लिए भेजा गया था।

रैकी दल की रिपोर्ट में यात्रा मार्ग पर कई गंभीर खतरे सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मिलिंग खट्टा से शिवलिंग तक बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं। इनके ऊपर और भीतर विशाल चट्टानें तथा बोल्डर अस्थिर स्थिति में पड़े हुए हैं। गुफा से सोरंग के बीच कई स्थानों पर बड़े बोल्डर गिरने से मार्ग बाधित हो गया है। ये चट्टानें एक-दूसरे के सहारे टिकी हुई हैं और किसी भी समय नीचे खिसक सकती हैं। प्रशासन का कहना है कि इन्हें हटाने के लिए विशेष उपकरणों और पर्याप्त समय की आवश्यकता होगी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तापमान बढ़ने से बर्फ तेजी से पिघल रही है। इससे भारी चट्टानों के खिसकने का खतरा बढ़ गया है। इसके कारण पत्थर गिरने, भूस्खलन और मलबा आने की आशंका बनी हुई है। विशेष रूप से मिलिंग खट्टा से पवित्र गुफा तक का हिस्सा, जहां श्रद्धालु आमतौर पर रात के समय गुजरते हैं, अत्यधिक जोखिमपूर्ण पाया गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए किन्नौर जिला प्रशासन ने यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है और श्रद्धालुओं से वर्तमान मार्ग पर यात्रा नहीं करने की अपील की है।

उधर, कुल्लू जिला प्रशासन ने भी सबसे कठिन मानी जाने वाली श्रीखंड महादेव यात्रा को अगली सूचना तक स्थगित करने के आदेश जारी किए हैं। जिला दंडाधिकारी एवं उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। यह निर्णय विशेषज्ञों की संयुक्त रिपोर्ट और यात्रा मार्ग पर संभावित प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को देखते हुए लिया गया है।

प्रशासन द्वारा गठित अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान (एबीवीआईएमएएस) मनाली, राजस्व विभाग और वन विभाग के विशेषज्ञों के संयुक्त दल ने यात्रा मार्ग का विस्तृत निरीक्षण किया था। 8 जून को सौंपी गई रिपोर्ट में भीमद्वारी से पार्वती बाग तक के मार्ग को अत्यधिक खतरनाक और असुरक्षित बताते हुए यात्रा पर रोक लगाने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग की संभावनाएं भी तलाशीं, लेकिन 18 जून को प्रस्तुत रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने उसे भी सुरक्षित नहीं माना।

विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा और प्रस्तावित दोनों मार्ग तीव्र ढलानों, ढीली और अस्थिर मिट्टी, संकरे रास्तों तथा कई नालों से होकर गुजरते हैं। इन क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने, फ्लैश फ्लड और मलबा आने का बड़ा खतरा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भीमद्वारी और पार्वती बाग के बीच किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव अभियान चलाना बेहद कठिन होगा। नालों के आसपास की जमीन भी कमजोर और खोखली पाई गई है। इससे वहां अस्थायी रोपिंग या शिविर लगाना भी सुरक्षित नहीं माना गया।

जिला प्रशासन ने आदेश दिया है कि यात्रा मार्ग पर लगाए गए सभी अस्थायी शिविर, टेंट, राशन की दुकानें और अन्य ढांचे आदेश जारी होने की तिथि से तीन दिनों के भीतर हटा दिए जाएं। पुलिस अधीक्षक कुल्लू, एसडीएम निरमंड और प्रभागीय वन अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधित मार्ग पर प्रवेश न करे। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा