भाषा के रोजगार के साथ जुड़ने से होता है जनसमुदाय का जुड़ाव: डा. विजय विशाल
मंडी, 15 सितंबर (हि.स.)। भाषा एवं संस्कृति विभाग मंडी की ओर से संस्कृति भवन मोतीपुर कांगणीधार मंडी में हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत हिंदी के विकास पर चर्चा एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने बताया कि हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत भाषा विभाग की ओर से हर वर्ष विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसके चलते स्कूली बच्चों की भाषण एवं निबंध प्रतियोगिता के अलावा हिंदी भाषा पर चर्चा और कवि गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम वरिष्ठ साहित्यकार डा. कमल प्यासा ने बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की । जबकि कवि आलोचक डा. विजय विशाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता के अलावा पत्र वाचन किया।
उन्होंने कहा कि भाषा की अपनी राजनीति होती है, जिसे समझने की आवश्यक्ता है। उन्होंने कहा कि कोई भी भाषा जब रोजगार से जुड़ती है,तो लोग उसे स्वयमेव ही अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा अपने आपमें समर्थ भाषा होने के साथ-साथ रोजगार से जुड़ी हुई है। जबकि क्षेत्रीय भाषाओं में समृद्ध साहित्य रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाषा को अपने विकास के लिए नई तकनीक से जुड़ना आवश्यक है।
वहीं पर डा. गंगाराम राजी ने कहा कि हिंदी भाषा संवाद का माध्यम होने के अलावा संपर्क की भाषा है। जबकि डा. कमल पयासा ने कहा कि हिंदी ने अपने भीतर दूसरी भाषाओं के शब्दों को समाया है, जिससे हिंदी का शब्द भंडार और भी समृद्ध हुआ है। साहित्यकार प्रकाशचंद्र धीमान ने कहा कि भाषा एक बहता नीर है, जो सदैव प्रवाहित रहती है। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें जिला भर से आए करीब तीस कवियों ने अपनी-अपनी कविताओं में हिंदी भाषा के महत्व और सामर्थय का वर्णन किया। जिसमें डा. राकेश कपूर ने हिंदी के महत्व को उजागर करती कविता का पाठ किया। वहीं पर कवि साहित्यकात मुरारी शर्मा ने अपनी कविता सुनाते हुए कहा- तुम्हारी ये व्याख्याएं जो हम पर थोंपते हो क्या सही है...बताओ तो सही।
रंगकर्मी सीमा शर्मा ने अमृता प्रितम की कविता का हिंदी रूपांतरण सुनाया, किरण गुलेरिया ने कहा- कुछ लोग कवि नहीं थे...पर उनकी आंखों में बरसो से भीगी ऋृतुएं रहती थी, वे छंद नहीं जानते थे पर मां के माथे की सिलवटें बिना पढ़े की समझ जाते थे। वहीं पौमिला ठाकुर ने कहा एक सिद्ध से प्रेम का अमोध शस्त्र पाया मैंने।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा