जनभागीदारी और जागरूकता से ही बनेगा टीबी मुक्त भारत : डाॅ. विवेक करोल

 


धर्मशाला, 24 मार्च (हि.स.)। जनभागीदारी और जागरूकता से ही टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। यह अभियान तभी सफल होगा जब सभी विभाग, संस्थान और आमजन मिलकर इसके लिए सक्रिय सहयोग दें। ये विचार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. विवेक करोल ने मंगलवार को जोनल अस्पताल धर्मशाला में विश्व टीबी दिवस के उपलक्ष्य में टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के लॉन्च के अवसर पर आयोजित मीडिया कार्यशाला में व्यक्त किए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एआई आधारित आकलन के माध्यम से जिले में 969 उच्च जोखिम वाले गांवों और वार्डों की पहचान की गई है, जहां लक्षित स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। अब तक संवेदनशील आबादी के 1 लाख 56 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जबकि शेष लोगों की जांच जारी है। जिले की 287 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। वर्तमान में जिले में 400 से अधिक टीबी चैंपियन सक्रिय रूप से जागरूकता फैलाने में योगदान दे रहे हैं।

इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के डाॅ. निकेत ने बताया कि टीबी उन्मूलन के लिए 10 लक्षणों के आधार पर अपफ्रंट एनएएटी टेस्टिंग तथा संवेदनशील आबादी के लिए एक्स-रे आधारित जांच को प्रमुख रणनीति के रूप में अपनाया गया है। इसके साथ ही 100 प्रतिशत टीबी केस नोटिफिकेशन, संपर्क ट्रेसिंग तथा टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आर.के. सूद ने बताया कि कांगड़ा जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के तहत जनभागीदारी आधारित माॅडल पर कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से हैंडहेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों और एनएएटी मशीनों के माध्यम से त्वरित जांच सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पोषण युक्त आहार टीबी मरीजों के शीघ्र स्वस्थ होने में सहायक होता है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया