तम्बाकू सेवन से तीन गुना बढ़ता है टीबी का खतरा, कांगड़ा में 20 प्रतिशत मरीज तंबाकू सेवन वाले

 

धर्मशाला, 01 जून (हि.स.)। तम्बाकू सेवन करने वाले लोगों में टीबी होने का खतरा सामान्य व्यक्तियों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होता है। यही नहीं, तम्बाकू टीबी के उपचार की सफलता को भी प्रभावित करता है और जटिलताओं व मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकता है। यह जानकारी रविवार को धर्मशाला में आयोजित टीबी सेवाओं और तम्बाकू निषेध सेवाओं के बेहतर समन्वय संबंधी कार्यशाला में दी गई।

कार्यशाला का आयोजन टीबी रोगियों को तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रभावी सहायता उपलब्ध करवाने और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के कर्मचारियों और विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. विवेक करोल ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक जिले में पंजीकृत 977 टीबी रोगियों में से 200 रोगी तम्बाकू का सेवन करते हैं, जो कुल मरीजों का लगभग 20 प्रतिशत है। इनमें से 163 रोगियों को तम्बाकू निषेध हेल्पलाइन से जोड़ा जा चुका है, जहां उन्हें तम्बाकू छोड़ने के लिए विशेषज्ञ परामर्श और सहायता प्रदान की जा रही है।

टीबी मुक्त भारत अभियान के 70 दिन पूरे, 187 विशेष शिविर आयोजित

बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के 70 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान कांगड़ा जिले में 187 विशेष शिविर आयोजित किए गए, जिनमें अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से टीबी की जांच की गई। प्रत्येक शिविर में औसतन 63 लोगों ने भाग लिया। अभियान के तहत संवेदनशील और उच्च जोखिम वाली आबादी की स्क्रीनिंग, सक्रिय रोगी खोज, जन-जागरूकता कार्यक्रम, निक्षय मित्रों की सहभागिता और टीबी रोगियों को पोषण सहायता उपलब्ध करवाने जैसे कार्य किए गए हैं।

स्क्रीनिंग और जनभागीदारी बढ़ाने पर रहेगा जोर

जिला अधिकारियों ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, फील्ड स्टाफ, सामुदायिक स्वयंसेवकों, निक्षय मित्रों और सहयोगी संस्थाओं के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अभियान के अगले चरण में स्क्रीनिंग गतिविधियों को और गति दी जाएगी। साथ ही शीघ्र निदान, उपचार अनुपालन, तम्बाकू निषेध सेवाओं से अधिक रोगियों को जोड़ने और जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब समाज के सभी वर्ग सक्रिय भागीदारी निभाएं। कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ सलाहकार डॉ. निकेत सतपारा, एमओएच-कम-जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आर.के. सूद सहित राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के विभिन्न अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया