स्प्रिंग्स के संरक्षण हेतु तकनीकी उपाय अपनाने की जरूरत : उपायुक्त हेमराज बैरवा
धर्मशाला, 22 मार्च (हि.स.)। विश्व जल दिवस के अवसर पर केंद्रीय भूमि जल बोर्ड, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा रविवार नको उपायुक्त कार्यालय में स्प्रिंगशेड प्रबंधन विषय पर जिला स्तरीय एन.ए.क्यू.आई.एम. 2.0 कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस एक दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कांगड़ा जिला प्रशासन एवं विभिन्न हितधारकों को स्प्रिंगशेड प्रबंधन की आवश्यकता और महत्ता के प्रति जागरूक करना था। क्षेत्र की बड़ी आबादी अपने दैनिक उपयोग और सिंचाई के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों (स्प्रिंग्स) पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन और वर्षा पैटर्न में बदलाव के कारण इन स्रोतों पर पड़ रहे प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला में स्प्रिंग्स के संरक्षण एवं पुनर्जीवन (कायाकल्प) से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेषज्ञों एवं हितधारकों के बीच विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जल संकट और आपदाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने कांगड़ा जिले के विविध भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार स्प्रिंग्स के पुनर्जीवन हेतु उपयुक्त तकनीकों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड, धर्मशाला के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. संजय पाण्डेय ने हिमाचल प्रदेश में बोर्ड द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने भू-जल अन्वेषण, माॅनीटरिंग, रिचार्ज, संसाधन आकलन तथा आगामी योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्प्रिंगशेड प्रबंधन, जिला कांगड़ा विषय पर किए गए कार्यों को भी साझा किया।
कार्यशाला में एनजीओ काॅर्ड द्वारा जन भागीदारी के माध्यम से स्प्रिंगशेड प्रबंधन विषय पर अपने अनुभव एवं कार्यों की प्रस्तुति दी गई।
इस अवसर पर वैज्ञानिक मानसी सिंह एवं शिवानी सोनी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक शिखर पाण्डेय, बिमल चंद्र सिन्हा, मनोहर कुमार, देवेन्द्र कुमार, अभिषेक वर्मा, प्रशान्त कुमार सिंह, अंजू देवी तथा इंजीनियर महावीर लाल मीणा ने अपने-अपने कार्यों की प्रस्तुतियां दीं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया