नशे से प्रभावित व्यक्ति को कलंक नहीं, सहयोग की जरूरत : डॉ. ओमेश भारती
धर्मशाला, 15 सितंबर (हि.स.)। जिला स्वास्थ्य विभाग, कांगड़ा एवं गुंजन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को जोनल अस्पताल धर्मशाला में नशा निवारण, प्रारंभिक रोकथाम, जोखिम में कमी एवं सामुदायिक सहभागिता के साथ-साथ सर्पदंश से बचाव एवं त्वरित उपचार पर मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में कांगड़ा जिला के विभिन्न स्वास्थ्य ब्लॉकों से सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कांगड़ा डॉ. ओमेश भारती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
सीएमओ डॉ. ओमेश भारती ने नशे की समस्या से जुड़े सामाजिक कलंक को एक गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि नशे से प्रभावित व्यक्ति के साथ-साथ उसका परिवार भी सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करता है। उन्होंने कहा किनशे की समस्या किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है और सही समय पर मार्गदर्शन, उपचार तथा परिवार और समाज के सहयोग से व्यक्ति इससे उबर सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे नशे से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील एवं गैर-भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण अपनाएं और उन्हें उपचार तथा पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने में सहयोग करें।
कार्यशाला के प्रमुख सत्र में विजय कुमार एवं पंकज पंडित ने प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक चर्चा के माध्यम से नशे की समस्या के कारणों, जोखिम एवं सुरक्षात्मक कारकों, प्राथमिक रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, जोखिम कम करने तथा उपचार एवं पुनर्वास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। नशा निवारण के लिए केवल नशे के आदी व्यक्ति के उपचार पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों एवं युवाओं में शुरुआत से रोकथाम, परिवारों की भूमिका, समुदाय की भागीदारी और समय रहते हस्तक्षेप पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
पीयर प्रेशर और जोखिमपूर्ण व्यवहार से बचाव जरूरी : डॉ. राजेश सूद
कार्यशाला के समापन सत्र में डॉ. राजेश सूद ने कहा कि नशा निवारण के लिए केवल जागरूकता संदेश देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं के साथखुले संवाद, जीवन कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और जोखिमपूर्ण व्यवहार से बचावपर काम करना जरूरी है।
सर्पदंश से बचाव एवं त्वरित उपचार पर भी दी जानकारी
कार्यशाला के दूसरे प्रमुख सत्र में सर्पदंश बचाव कार्यक्रम विशेषज्ञअर्चना फुल्ल ने सर्पदंश से बचाव, जोखिम कम करने तथा सर्पदंश की स्थिति में अपनाए जाने वाले आवश्यक एवं व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओमेश भारती ने भी सर्पदंश से बचाव के लिए रात में टॉर्च का उपयोग करने, पैरों में जूते पहनने, घरों में सांपों एवं अन्य जहरीले जीवों के प्रवेश की संभावनाओं को कम करने तथा चूहों की समस्या को नियंत्रित रखने जैसे उपायों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में पीड़ित को शांत रखते हुए बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया