कांगड़ा में शुरू हो रहा 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर, पंजाब, जम्मू और हिमाचल के 80 प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा

 


धर्मशाला, 21 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में मंगलवार से तीन राज्य के कांग्रेस जिलाध्यक्षों का 10 दिवसीय ट्रेनिंग कैंप दोपहर बाद शुरू हो रहा है। इस कैंप में पंजाब, जम्मू कश्मीर और हिमाचल के जिला अध्यक्षों को कांग्रेस के शीर्ष नेता अगले 10 दिन तक कांगड़ा के यात्री सदन में ट्रेनिंग देंगे। इसका मुख्य उद्देश्य बूथ स्तर पर कांग्रेस को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना है।

कांग्रेस जिला अध्यक्षों के इस प्रशिक्षण कैंप में पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग, हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और जम्मू कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा सोमवार शाम को ही कांगड़ा पहुंच गए हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के प्रशिक्षण प्रभारी सचिन राव मंगलवार दोपहर 2 बजे कैंप का शुभारंभ करेंगे।

प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जोकि पिछले कल सोमवार से कांगड़ा प्रवास पर हैं, वह भी कुछ देर के लिए कैंप में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उनके फतेहपुर और ज्वालामुखी में कुछ उद्घाटन-शिलान्यास कार्यक्रम है।

उधर मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा ने भी सोमवार शाम को शिविर स्थल पर पहुंचकर और तैयारियों का जायजा लिया था। सुनील शर्मा ने बताया कि इस दौरान पार्टी के नेता और संगठन के वरिष्ठ राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी जिलाध्यक्षों को संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और विपक्षी दलों के दुष्प्रचार का सामना करने के तरीके बताएंगे।

राहुल-खड़गे भी आ सकते हैं कांगड़ा

वहीं कैंप में हिस्सा लेने के लिए कांगड़ा पंहुचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि 30 अप्रैल को राहुल गांधी भी कांगड़ा आएंगे और तीनों राज्यों के पदाधिकारियों को ट्रेनिंग देंगे। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गान्धी के भी हिमाचल आने की चर्चा है, लेकिन उनके आने का कार्यक्रम अभी फाइनल नहीं है।

इस कैंप में तीन राज्यों के लगभग 80 डेलिगेट्स हिस्सा लेंगे। दरअसल, कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के तहत पार्टी को मजबूत बनाने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के ट्रेनिंग कैंप कराने का फैसला लिया है। दूसरे प्रदेशों में भी कांग्रेस जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया