अक्तूबर में पर्यटन सीजन ने पकड़ी रफ्तार, मैक्लोडगंज में 95 फीसदी होटल भरे
धर्मशाला, 04 अक्टूबर (हि.स.)। अक्तूबर शुरू होते ही धर्मशाला-मैक्लोडगंज में पर्यटन सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है। गांधी जयंती की छुट्टी और सप्ताहांत के चलते पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में पर्यटक धर्मशाला, मैक्लोडगंज, धर्मकोट, भागसूनाग और नड्डी पहुंच रहे हैं। होटलों में कमरों की मांग तेजी से बढ़ी है और मैक्लोडगंज क्षेत्र में होटल ऑक्यूपेंसी 90 से 95 फीसदी तक पहुंच गई है। बरसात के दौरान यही ऑक्यूपेंसी 30 से 40 फीसदी के आसपास रह गई थी।
पर्यटकों की बढ़ी आमद का असर अब केवल होटल और रेस्तरां कारोबार पर ही नहीं, बल्कि पर्यटन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। टैक्सी, स्थानीय दुकानदारों और साहसिक पर्यटन गतिविधियों से जुड़े कारोबारियों को भी राहत मिली है। आज बड़ी संख्या में पर्यटक त्रियुंड ट्रैकिंग के लिए रवाना हुए। वहीं खनियारा-खड़ौता घाटी के प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थलों ठठरना, होड़ी धार, ज्वाला और करेरी झील की ओर भी पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती के बीच सुकून के पल बिताने पहुंच रहे हैं।
उधर, परौर में आयोजित राधा स्वामी सत्संग के चलते भी धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही बढ़ी है। सत्संग में पठानकोट, होशियारपुर और पंजाब के अन्य क्षेत्रों समेत विभिन्न स्थानों से श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ गया है। पर्यटन सीजन और सत्संग, दोनों के कारण धर्मशाला-मैक्लोडगंज मार्ग पर वाहनों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है।
इस बढ़ी भीड़ के बीच यातायात व्यवस्था की चुनौती भी सामने आ रही है। कोतवाली बाजार से मैक्लोडगंज और खड़ा डंडा मार्ग पर कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनी रही। सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग और संकरे मार्गों के कारण पर्यटक वाहनों को कई जगह रुक-रुककर आगे बढ़ना पड़ा। ट्रैकिंग स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर भी वाहनों की संख्या बढ़ने से दबाव बढ़ा है।
होटल एवं रेस्तरां एसोसिएशन स्मार्ट सिटी धर्मशाला के अध्यक्ष राहुल धीमान ने बताया कि अक्तूबर शुरू होते ही पर्यटन कारोबार में सुधार आया है। सप्ताहांत में होटल ऑक्यूपेंसी 90 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। मौसम सुहावना रहने और छुट्टियों के चलते आने वाले दिनों में भी पर्यटकों की अच्छी आमद रहने की संभावना है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया