चीनी दमन के खिलाफ फिर उठी आवाज़ : वीर रंगजेन लोगा की याद में उमड़ा जनसैलाब
धर्मशाला, 18 जुलाई (हि.स.)। मिनी ल्हासा मैकलोडगंज की सड़कों पर शनिवार को देशभक्ति और आज़ादी के जज्बे का एक अनूठा सैलाब देखने को मिला। तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान सेनानी 'नायक' वीर रंगजेन लोगा की स्मृति में तिब्बती समुदाय ने एक विशाल मार्च निकालकर चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।
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धर्मशाला के छह प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के संयुक्त तत्वावधान में इस भावपूर्ण स्मृति मार्च (गौम ब्रौद) का सफल आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन में भारी संख्या में तिब्बती युवाओं के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हाथों में तिब्बती झंडे और बैनर थामे प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में तिब्बत की आज़ादी के लिए अपनी आवाज़ बुलंद की। इस दौरान पूरा क्षेत्र देशभक्ति और तिब्बती स्वतंत्रता के नारों से गूंज उठा।
शहीद स्मारक पर दी गई अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि
यह विशाल मार्च मैकलोडगंज के मुख्य चौक से शुरू होकर तिब्बती शहीद स्मारक पर जाकर संपन्न हुआ। मार्च के समापन अवसर पर वीर रंगजेन लोगा सहित तिब्बत की खातिर अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात शहीदों की याद में एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जहाँ उपस्थित लोगों ने नम आंखों से अपने नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
आयोजक समिति ने इस मौके पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि तिब्बती शहीदों का बलिदान किसी भी सूरत में व्यर्थ नहीं जाएगा। समिति के प्रतिनिधियों ने कहा, यह स्मृति मार्च हमारी नई पीढ़ी को हमारे ऐतिहासिक संघर्ष और अधिकारों की निरंतर याद दिलाता रहेगा। पूरे तिब्बती समुदाय ने एकजुट होकर वीर रंगजेन लोगा के अदम्य साहस को नमन किया और तिब्बत की न्यायपूर्ण आज़ादी तक अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया