समय रहते हुई बारिश से खराब होने से बच गई 80 फीसदी चाय की फसल

 


धर्मशाला, 29 मार्च (हि.स.)। प्रदेश सहित कांगड़ा घाटी में हाल ही हुई बारिश और बर्फबारी न सिर्फ किसानी व बागवानी बल्कि चाय उद्योग के लिए भी वरदान साबित हुई है। समय रहते यह बारिश न होती तो करीब 80 फीसदी चाय की फसल खराब होने की कगार पर पहुंच जाती। चाय बागानों में 20 से 25 मार्च के बीच पौधों में नई पत्तियां आना शुरू हो जाती हैं। ऐसे में अगर यह बारिश न होती तो बागानों में मौजूद नमी से नई पत्तियां कम आती, जिससे अप्रैल माह का चाय उत्पादन प्रभावित हो सकता था। ऐसे में धर्मशाला चाय उद्योग प्रबंधन का कहना है कि पिछले दिनों हुई बारिश, चाय उद्योग के लिए संजीवनी साबित हुई है, अन्यथा 80 फीसदी के करीब चाय की फसल खराब हो जाती।

दिसंबर-जनवरी-फरवरी में नहीं हुई बारिश

बारिश न होती तो चाय उद्योग का मार्च-अप्रैल का पहला तोड़ खत्म हो जाता। बरसात के बाद बारिशें नहीं हो पाई थी, दिसंबर,-जनवरी व फरवरी में बारिश का अभाव रहा। चाय बागानों को मिन्योरिंग की जरूरत थी, जो कि शुरू कर दी हैं, जिससे उम्मीद है कि नई पत्तियां अच्छी आएंगी। ऐसे में अब एक बार फिर चाय की अच्छी फसल होने की उम्मीद बंध गई है जिससे खासकर चाय उत्पादकों ने राहत की सांस ली है।

सीनियर मैनेजर, चाय उद्योग धर्मशाला देविंदर पठानिया ने बताया कि जिला कांगड़ा में 20-25 मार्च के बाद टी फ्लशिंग शुरू हो जाती है, ऐसे में बारिश न होने के चलते पहले की नमी से थोड़ा बहुत ही फ्लश आना था, उसके बाद फ्लश नहीं आता और करीब 80 फीसदी फसल ही खराब हो जाती। बारिश होने के बाद आस है कि अप्रैल में उत्पादन अच्छा होगा।

वहीं अगर बात धर्मशाला और जिला के आसपास के क्षेत्रों में चाय उत्पादन की करें तो पिछले छह वर्षों में हुए चाय उत्पादन का रिकॉर्ड इस तरह का रहा है।

वर्ष 2020 में एक लाख 69 हजार 21 किलोग्राम, वर्ष 2021 में एक लाख 37 हजार 900 किलोग्राम, वर्ष 2022 में एक लाख 45 हजार 682 किलोग्राम, वर्ष 2023 में एक लाख 65 हजार 13 किलोग्राम, वर्ष 2024 में एक लाख 38 हजार 17 किलोग्राम तथा वर्ष 2025 में एक लाख 35 हजार किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया