खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत केंद्र से मिलने वाले फंड में हो रही है देरी : खेल मंत्री

 




धर्मशाला, 13 अगस्त (हि.स.)। युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादविंदर गोमा ने कहा कि 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम के तहत केंद्र से मिलने वाले फंड में देरी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार से समय पर किस्तें जारी नहीं होने के कारण हाई-अल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर सहित प्रदेश की कई महत्वपूर्ण खेल परियोजनाओं के काम प्रभावित हो रहे हैं। वीरवार को धर्मशाला में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री गोमा ने कहा कि राज्य सरकार अपने स्तर पर खेल सुविधाओं के रखरखाव और विकास के लिए बजट उपलब्ध करवा रही है, लेकिन केंद्र से मिलने वाली राशि का समय पर जारी होना आवश्यक है। उन्होंने चंबा और धर्मशाला में नए खेल हॉस्टल और खेल केंद्र स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की जानकारी भी दी।

गोमा ने बताया कि प्रदेश में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से इस वर्ष अक्टूबर या नवंबर में राज्य स्तरीय खेल महाकुंभ आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देश पर होने वाले इस आयोजन के लिए लगभग 15 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है।

यह प्रतियोगिताएं ब्लॉक और क्लब स्तर से शुरू होकर जिला और राज्य स्तर तक पहुंचेंगी। इसमें प्रदेशभर से 8 से 10 हजार युवाओं के हिस्सा लेने की संभावना है। विजेताओं को पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार शाहपुर और जयसिंहपुर समेत सात-आठ इनडोर स्टेडियमों के रखरखाव के लिए अपने स्तर पर बजट जारी कर चुकी है।

पत्रकार वार्ता में खेल मंत्री ने कांगड़ा के विकास को लेकर विपक्ष के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 600 करोड़ रुपए का मेगा एडवेंचर और जू प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जिससे पर्यटन और साहसिक खेलों को बढ़ावा मिलेगा। टांडा मेडिकल कॉलेज में पुरानी मशीनरी को बदला गया है और एसोसिएट प्रोफेसर तथा सीनियर रेजिडेंट के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री ने गुसाऊ पेयजल परियोजना को भी मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री के लिए अमर्यादित भाषा पर लगाम लगाएं सुधीर शर्मा

खेल मंत्री ने स्थानीय विधायक सुधीर शर्मा के वक्तव्य पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा राज्य में किये जा रहे विकास को भाजपा पचा नहीं पा रही है जिसकी हताशा में भाजपा मुख्यमंत्री के प्रति अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने पर उतर आई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल देवताओं की भूमि है और यहां के लोग अपनी संस्कृति और संस्कारों के लिए देशभर में जाने जाते हैं। परन्तु जिस भाषा का उपयोग सुधीर शर्मा ने किया है, उससे हिमाचल की छवि को भी लांछित किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की राजनीति में ऐसी अमर्यादित भाषा का पहली बार इस्तेमाल हुआ है जो खेद का विषय है और भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया