संत कबीर के जीवन से समानता और समरसता की मिलती है प्रेरणा : पठानिया
धर्मशाला, 29 जून (हि.स.)। उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि 15वीं सदी के महान समाज सुधारक, निर्भीक चिंतक, रहस्यवादी कवि एवं संत शिरोमणि गुरु कबीर के लिए मानवता ही सबसे बड़ा धर्म था। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने विचारों से समाज को अंधविश्वास, पाखंड, व्यक्ति पूजा, जाति-पाति और ऊंच-नीच जैसी कुरीतियों से ऊपर उठकर सत्य, समानता, समरसता, बंधुता और मानवता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज भी संत कबीर की शिक्षाएं समसमायिक हैं तथा हमें उनके बतलाए हुए मार्ग पर चलना चाहिए।
सोमवार को शाहपुर के बलड़ी में कबीर जयंती समारोह में बतौर मुख्यातिथि उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि संत कबीर के अनुसार ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं। उन्होंने एक ऐसे समाज की कल्पना की जहां जन्म के आधार पर नहीं, बल्कि कर्म और विचारों के आधार पर व्यक्ति का महत्व हो।
उन्होंने कहा कि बचपन से ही कबीरदास का हृदय प्रेम और ज्ञान से भरा हुआ था। उन्होंने सरल हिंदी में सैकड़ों सुंदर दोहे रचे, ताकि सभी उन्हें आसानी से समझ सके और सच या भगवान की खोज की यात्रा की शुरुआत कर सके। उनके दोहे इतने प्रसिद्ध हो गए कि आज कई स्कूलों में उन्हें पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों तथा युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनने के लिए कबीर की वाणी को आत्मसात करना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया