पांच ट्रिलियन डॉलर की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत शिक्षा प्रणाली पर निर्भर : अनुराग ठाकुर

 


धर्मशाला, 27 सितंबर (हि.स.)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर ने विकसित भारत 2047 को आकार देने में शिक्षा की परिवर्तनकारी भूमिका पर जोर दिया है। अनुराग ठाकुर ने पारंपरिक कक्षा की भूमिकाओं से बाहर निकलने के लिए विश्वविद्यालयों की सराहना की और कहा कि सामाजिक गतिशीलता, समानता और डिजिटल डिवाइड जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा के वैकल्पिक मॉडल महत्वपूर्ण हैं।

अनुराग ठाकुर ने यह बात रविवार को श्री साई विश्वविद्यालय, पालमपुर में समाज, शिक्षा और सामाजिक विकास : उभरते मुद्दे और विकल्प विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कही।

अनुराग सिंह ठाकुर ने शिक्षा को शिक्षाविदों और राजनीतिक वर्ग के बीच एक साझा जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि 5 ट्रिलियन डॉलर की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए भारत की आकांक्षाएं पूरी तरह से एक मजबूत शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करती हैं। उन्होंने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (वैश्विक नवाचार सूचकांक) में देश की उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डाला, जो 133 देशों में 2015 के 81वें स्थान से छलांग लगाकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह तीव्र प्रगति उस नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है जो 2014 के बाद से फला-फूला है, जिससे यह अनिवार्य हो जाता है कि भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए शिक्षा और नवाचार को एक साथ लाया जाए।

भारतीय शिक्षा पर रीसेट बटन दबाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए अनुराग ठाकुर ने उस बड़े पैमाने के बुनियादी ढांचे के विस्तार की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसने देश भर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाया है। उन्होंने कहा कि देश में आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर 23, आईआईएम की संख्या 13 से बढ़कर 22, विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,330 हो गई है, और मेडिकल कॉलेजों में 118.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रशंसा करते हुए, अनुराग ठाकुर ने कहा कि इसने प्रभावी रूप से राष्ट्रीय फोकस को रटने की विद्या से हटाकर एक समग्र, बहु-विषयक और कौशल-उन्मुख दृष्टिकोण की ओर स्थानांतरित कर दिया है, जो वैज्ञानिक स्वभाव, लचीलापन और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों से विकसित भारत के संकल्प के साथ जुड़ने और भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करना होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया