ग्लोबल रैंकिंग सुधारने को एचपीसीयू और एमजीसीयू में समझौता

 


धर्मशाला, 29 मई (हि.स.)। देश में उच्च शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार ने एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। सीयूएचपी के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल और एमजीसीयू के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव की मौजूदगी में शुक्रवार को यह एमओयू साइन हुआ। प्रो. बंसल ने बताया कि वैश्विक रैंकिंग में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए 'क्वालिटी ऑफ रिसर्च' और 'क्वालिटी ऑफ जर्नल्स' सबसे अहम हैं। इसी मानक को हासिल करने के लिए दोनों विश्वविद्यालय मिलकर काम करेंगे।

एक्सचेंज प्रोग्राम और जॉइंट सुपरविजन से बढ़ेगा शिक्षा का स्तर

अब केंद्रीय विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए फैकल्टी और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम को अनिवार्य किया गया है। इस समझौते के बाद दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षक बेहतरीन और नए विषयों में 'जॉइंट सुपरवाइजर' (संयुक्त मार्गदर्शक) बन सकेंगे। इसके तहत शुरू होने वाले 'जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट्स' में दोनों राज्यों के छात्र और शोधकर्ता मिलकर महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शोध करेंगे। इस साझा प्रयास से दोनों विश्वविद्यालयों के 'कोर सब्जेक्ट्स' (मुख्य विषयों) में विशेषज्ञता और ज्ञान का सीधा आदान-प्रदान हो सकेगा।

बिना वित्तीय बोझ के साझा होंगे संसाधन और ज्ञान का खजाना

यह साझेदारी पूरी तरह से बिना किसी वित्तीय दायित्व के संचालित होगी, जिससे दोनों पक्षों को लाभ मिलेगा। यदि भविष्य में कोई वित्तीय लेन-देन या बड़ा प्रोजेक्ट शुरू होता है, तो उसके लिए अलग से कानूनी समझौता किया जाएगा। इस 5 वर्षीय समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित करेंगे। साथ ही, दोनों विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों में मौजूद किताबों, शोध पत्रिकाओं और डिजिटल शिक्षण सामग्रियों को भी आपस में साझा किया जाएगा। इस समझौते में डेटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया