विधायक सुधीर शर्मा का मुख्यमंत्री पर तंज, एक्साइज विभाग को सरकार ने बना दिया प्रयोगशाला
धर्मशाला, 14 जनवरी (हि.स.)। धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने एक बार फिर मुख्यमंत्री एवं प्रदेश सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक्साइज विभाग को अपनी प्रयोगशाला बना कर रख दिया है, जहाँ बिना दूरदर्शिता और बिना ज़मीनी हकीकत समझे रोज़ नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
बुधवार को जारी एक प्रेस बयान में सुधीर शर्मा ने कहा कि पहले सरकार ने शराब नीति में अचानक बदलाव किया, जिसके चलते ठेके नीलाम नहीं हो पाए। इसके बाद सरकार ने खुद ही ठेके चलाने का फैसला लिया, जो पूरी तरह विफल साबित हुआ। हालात यहाँ तक पहुँचे कि ठेकों की सुरक्षा के लिए होमगार्ड्स की ड्यूटी लगा दी गई, फिर भी व्यवस्था नहीं संभली। अब जब घाटे के आसार साफ़ दिखाई देने लगे हैं, तो सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष से ई-टेंडरिंग लागू करने का नया फरमान जारी कर दिया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि ई-टेंडरिंग से प्रदेश के स्थानीय लोगों को भारी नुकसान होगा। ऑनलाइन टेंडर कोई भी, कहीं से भी ले सकेगा। यदि ठेके प्रदेश से बाहर के लोगों के हाथों में चले गए, तो स्थानीय लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इससे सिर्फ ठेकेदार ही नहीं, बल्कि उनके अधीन काम करने वाले सैकड़ों-हज़ारों कर्मचारी, छोटे व्यापारी और परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
विधायक ने कहा कि पंजाब में ई-टेंडरिंग का प्रयोग पूरी तरह विफल हो चुका है, इसके बावजूद हिमाचल सरकार वही असफल मॉडल यहाँ लागू करने पर आमादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भी किसी से छिपा नहीं है कि सिरमौर और सोलन की दो शराब फैक्ट्रियों पर हुई कार्रवाई को कमजोर करने और मामले को दबाने के लिए बड़े साहब के इशारे पर किन-किन लोगों ने फोन किए।
सुधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार को न तो प्रदेश के हितों की चिंता है और न ही प्रदेश के लोगों के भविष्य की। पूरी व्यवस्था केवल मित्रों को मौज कराने और अपने लोगों को बचाने में व्यस्त है। यही कारण है कि हिमाचल में आज हर विभाग में अव्यवस्था और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत एक्साइज नीति पर पुनर्विचार करे, स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे और असफल प्रयोगों से प्रदेश को बचाए। अन्यथा भाजपा इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से उठाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया