डॉ आंबेडकर ने समाज में जड़ हो चुकी व्यवस्थाओं को बदलने का किया प्रयास : डॉ. किस्मत कुमार

 


धर्मशाला, 16 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय समाज की सुंदरता इसकी गतिशीलता है। यह समाज जड़ न होकर स्वयं को सदैव युगानुकूल अपडेट करता रहता है। भारत की इसी परंपरा के अनुरूप डॉ. आम्बेडकर ने समाज में जड़ हो चुकी व्यवस्थाओं को युगानुकूल बदलने के प्रयास अपने समय में किए। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर में ‘डॉ. आम्बेडकर के चिंतन में भारतीय समाज विषय पर आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत करते हुए विश्वविद्यालय के आम्बेडकर अध्ययन केंद्र के सहायक आचार्य डॉ. किस्मत कुमार ने यह उद्गार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में डॉ. आम्बेडकर के चिंतन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. किस्मत कुमार ने कहा कि महापुरुषों के कार्यों का मूल्यांकन तात्कालिक समय में करना बहुत कठिन होता है। इसी कड़ी में डॉ. आम्बेडकर के कार्य इतने महत्वपूर्ण हैं कि जन्म के 136 वर्ष बाद भी वे और उनके द्वारा किए गए कार्य समाज के लिए प्रेरक हैं। उन्होंने कहा कि समाज की पहचान और अध्ययन छोटी-मोटी बीमारियों के आधार पर नहीं बल्कि परंपराओं के आधार पर होता है। डॉ. आम्बेडकर का संपूर्ण जीवन और उनके द्वारा किए गए कार्यों का अध्ययन भी भारत की परंपराओं की पृष्ठभूमि पर ही होना चाहिए।

महिला अधिकारों को दी संवैधानिक सुरक्षा : प्रो. प्रदीप कुमार

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अधिष्ठाता आकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार ने महिला सशक्तिकरण में डॉ. आम्बेडकर के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामाजिक एकात्मता के अलावा महिला उत्थान में भी डॉ. आम्बेडकर का योगदान अतुलनीय है। उनके द्वारा बनाए हिन्दू कोड बिल में महिलाओं को बराबरी के अधिकार और उनके द्वारा दिए गए संविधान में महिलाओं को जो बराबर वोट का अधिकार दिया गया, वो अपने आप को विकसित और आधुनिक कहने वाले देशों से बहुत पहले दिया गया। उन्होंने कहा कि आज भारत की संसद में जो महिला आरक्षण बिल पास करने की चर्चा हो रही है, उसके पीछे भी प्रेरणा शक्ति डॉ. आम्बेडकर ही हैं।

विशिष्ट अतिथि विक्की शुभ ने डॉ. आम्बेडकर की शिक्षा यात्रा के बारे में बताते हुए समाज और विशेषकर विद्यार्थियों को शिक्षित होने का संदेश दिया। सहायक आचार्य एवं अध्ययन मण्डल के पालक डॉ. चंदन आनंद ने अतिथियों का औपचारिक स्वागत करते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने अध्ययन को राष्ट्र की प्रगति के साथ जोड़ें। उन्होंने अध्ययन मंडल की गतिविधियों के बारे जनकारी देते हुए विद्यार्थियों से इनमें सम्मिलित होने को कहा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया