जल शक्ति विभाग के पैराकर्मियों के लिए बने पांच वर्ष की पॉलिसी : अमन
धर्मशाला, 14 जनवरी (हि.स.)। जल शक्ति विभाग के पैरा कर्मियों के लिए आठ के बजाय पांच वर्ष की नीति बनाई जाए और इसकी अधिसूचना जल्द की जाए। शार्ट टर्म पॉलिसी से ही पैरा कर्मियों को पेंशन व अन्य लाभ मिल पाएंगे। यदि सरकार ने मांगों को नहीं माना तो विभाग के पैरा कर्मी फरवरी माह में हड़ताल पर जाएंगे, जो कि मांगें पूरी न होने तक जारी रहेगी। यह बात कर्मचारी संघर्ष मोर्चा व पैरा कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष अमन शर्मा ने बुधवार को धर्मशाला में प्रेसवार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग में पैरा कर्मचारी पैरा पंप आपरेटर व पैरा फीटर वर्ष 2017 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2020 में जल शक्ति विभाग में तीन श्रेणियों में पैरा पंप आपरेटर, पैरा फीटर व मल्टी पर्पज वर्कर की भर्ती हुई। उस समय मानदेय मल्टी पर्पज वर्कर का मानदेय 3900 रुपये और 4600 रुपये पैरा पंप आपरेटर व फीटर का तय किया गया था। वर्तमान में पैरा पंप आपरेटर व फीटर को 6600 रुपये मानदेय दिया जा रहा है। पैरा पंप आपरेटर व फीटर के लिए सरकार की ओर से 8 वर्ष की पॉलिसी बताई गई है, जबकि मल्टी पर्पज वर्कर को विचाराधीन रखा गया है।
अमन शर्मा ने कहा कि वर्ष 2017 में नियुक्त पैरा कर्मियों का 8 साल की पॉलिसी के तहत कार्यकाल अक्टूबर माह में पूरा हो चुका है, जबकि जनवरी माह भी आधा बीतने के बावजूद अभी तक इनकी नोटिफिकेशन नहीं हुई है। आगामी केबिनट मीटिंग में सरकार की ओर से पैरा कर्मियों के संबंध में कोई नोटिफिकेशन नहीं की जाती है तो जल शक्ति विभाग के पैरा कर्मी अगले माह से हड़ताल पर चले जाएंगे और हड़ताल मांगें पूरी न होने तक जारी रहेगी। पहले आयोजित विधानसभा सत्र में तीनों श्रेणियों के लिए 8 वर्ष की पॉलिसी बताई गई थी, जबकि पिछले मानसून सत्र में मल्टी पर्पज वर्कर की पॉलिसी को विचाराधीन बताया गया। पैरा कर्मियों की किसी भी श्रेणी की पॉलिसी की अभी तक नोटिफिकेशन नहीं हुई है।
अमन ने कहा कि सरकार से पैरा कर्मियों के लिए 8 के बजाय 5 वर्ष की पॉलिसी बनाने का आग्रह किया जा रहा है, ऐसा न होने पर पैरा कर्मी जो कि 45 वर्ष की उम्र में कार्यरत हुए हैं, वे पेंशन से वंचित हो जाएंगे। साथ ही सरकार जिस तरह से ओपीएस देने की बात कह रही है, ऐसे में 8 वर्ष की पॉलिसी के तहत पैरा कर्मियों को ओपीएस का लाभ नहीं मिल पाएगा, क्योंकि ओपीएस के लिए दस वर्ष की नियमित सेवाएं होना जरूरी है। विपक्ष की ओर से पैरा कर्मियों के मसले को सत्र में उठाया जाता रहा है, जबकि इस बार केबिनेट रैंक जीएस बाली ने भी पैरा कर्मियों की आवाज सदन में उठाई है। पैरा कर्मियों को जो मानदेय दिया जा रहा है, वो वर्तमान महंगाई के दौर में नाकाफी है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया