नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल कानून नहीं, समावेशी लोकतंत्र की ओर क्रांतिकारी कदम : प्रो. बंसल

 




धर्मशाला, 13 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में विचार-विमर्श सत्र का आयोजन हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के देहरा परिसर में सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन’ विषय पर एक विशेष चर्चा का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय की 'स्पर्श शीर्ष समिति' और एनएसएस देहरा इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने इस अधिनियम को राष्ट्र की दिशा बदलने वाला सुधार बताया।

प्रो. बंसल ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करने वाला एक परिवर्तनकारी कदम है।

कुलपति प्रो. बंसल ने संविधान के 106वें संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) की व्याख्या करते हुए कहा कि विधायी निकायों में महिलाओं को मिलने वाला 33 प्रतिशत आरक्षण ऐतिहासिक अल्प-प्रतिनिधित्व को समाप्त करेगा। उन्होंने कहा कि इससे न केवल संरचनात्मक लैंगिक असमानता कम होगी, बल्कि सार्वजनिक जीवन और सिविल सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी के लिए नए द्वार खुलेंगे। यह सुधार आधारभूत स्तर से लेकर अभिजात वर्ग तक स्थापित पितृसत्तात्मक मानदंडों को चुनौती देगा और आने वाली पीढ़ी की बालिकाओं के लिए नए 'रोल मॉडल' तैयार करेगा।

प्रधानमंत्री के संबोधन का सजीव प्रसारण

कार्यक्रम की शुरुआत स्पर्श शीर्ष समिति की अध्यक्ष प्रो. सूर्य रश्मि रावत के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने नारी सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताया। सत्र के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष संबोधन का लाइव प्रसारण भी किया गया। विश्वविद्यालय के धर्मशाला, शाहपुर और देहरा परिसरों में इस कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री के विचारों को सुना और समझा।

छात्राओं और विशेषज्ञों ने रखे बेबाक विचार

इस विचार-विमर्श सत्र में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी 13 महिला प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें छात्राएं, शिक्षक, गृहिणियां, अधिवक्ता और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल रहीं। प्रतिभागियों ने अधिनियम के व्यावहारिक पक्ष और सामाजिक जागरूकता पर अपने विचार साझा किए। चर्चा के अंत में सभी ने इस अधिनियम के शीघ्र क्रियान्वयन का सामूहिक संकल्प लिया।

सत्र के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित भी किया गया। प्रतियोगिता में समाजशास्त्र विभाग की शिल्पा (द्वितीय सेमेस्टर) ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि अंजलि (चतुर्थ सेमेस्टर) दूसरे स्थान पर रहीं। शोध छात्राओं में दृश्य कला विभाग की भारती और समाजशास्त्र विभाग की निहारिका सिंह ने संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया