राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सज्जन शक्ति का किरदार अहम : विनय दीक्षित

 




धर्मशाला, 22 जून (हि.स.)। पंचनद शोध संस्थान हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय अध्ययन केंद्र एवं धर्मशाला अध्ययन केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से “राष्ट्र निर्माण में समाज की सज्जन शक्ति की भूमिका -विकसित भारत 2047 के विशेष परिप्रेक्ष्य में'' विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में बतौर मुख्यातिथि अखिल भारतीय प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय सह संयोजक विनय दीक्षित रहे।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ज़ब समाज की सज्जन शक्ति राष्ट्र निर्माण कार्यों में पिछली पंक्ति में रहती है अथवा निष्क्रिय रहती है तब समाज की नकारात्मक ताकतें सर उठाकर नकारात्मक परिस्थितियों का निर्माण करती हैं। जिसका दुष्परिणाम शेष समाज, राष्ट्र और सम्पूर्ण मानवता को उठाना पड़ता है और राष्ट्र के सकारात्मक विकास की गति अवरुद्ध हो जाती है तथा नकारात्मक घटनायें होने लगती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि महाभारत का विध्वंसक युद्ध न हुआ होता यदि द्रौपदी के चीर हरण के समय ही सभा में उपस्थित सज्जन शक्ति जैसे भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, विदुर व अन्य ने मौके पर ही हस्तक्षेप किया होता।

उन्होंने कहा कि आज भी हम देखते हैं कि समाज का पढ़ा -लिखा, चिंतन- मनन करने वाला तथा अच्छी सोच रखने वाला वर्ग प्रायः राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं से दूरी बनाकर रहता है। जिसके कारण अनेक नुकसानदेह एवं नकारात्मक घटनायें घटती रहती हैं।

दीक्षित ने समाज की सज्जन शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि यही सही समय है ज़ब देश और समाज की सज्जन शक्ति आगे आए और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अपना अधिकतम योगदान दे।

गोष्ठी की मुख्य प्रस्तोता और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, वेद व्यास परिसर, बलाहर कांगड़ा की महिला अध्ययन केंद्र की निदेशिका प्रो. मोहिनी अरोड़ा ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि ज़ब समाज, देश और मानवता के समक्ष संकट की स्थिति उत्पन्न होती है तब सज्जन शक्ति अपने मेधा पूर्ण लेखन, भाषणों, साहित्य व अन्य प्रयासों से लोगों को जगाने और संकट से पार पाने के लिए उत्साहित करती है। उन्होंने बताया कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्र को जगाने में तत्कालीन सज्जन शक्ति ने अपने विविध माध्यमों से महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था।

विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता शैक्षणिक प्रो. प्रदीप कुमार ने बताया कि वह समाज की सज्जन शक्ति ही है जो गलत रास्ते पर जाने से एक व्यक्ति, समाज, राष्ट्र, व्यवस्था व सरकारों को रोकती है। धर्मशाला अध्ययन केंद्र के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विजय शर्मा ने अपने व्यक्तिगत जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह उनके जीवन में आए सज्जन व्यक्तियों के योगदान की वजह से ही वह हमेशा सही रास्ते पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन कर सके।

कार्यक्रम के बाद दोनों अध्ययन केंद्रों की सांगठनिक बैठक भी हुई जिसमें अनेक विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र प्रो. सुनील कुमार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर प्रचारक विंकन कुमार, पंचनद शोध संस्थान हिमाचल प्रदेश के प्रान्त समन्वयक डॉ. उदय भान सिंह, प्रान्त शोध आयाम प्रमुख प्रो. योगेंद्र धामा, विश्वविद्यालय अध्ययन केंद्र संयोजक प्रो. बृहस्पति मिश्र, प्रज्ञा प्रवाह प्रान्त संयोजक हिमांशु मिश्र सहित दोनों ही अध्ययन केंद्रों के सदस्य व अन्य गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया