केंद्रीय विश्वविद्यालय ने नए शैक्षणिक सत्र से शुरू किए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम : कुलपति
धर्मशाला, 12 जुलाई (हि.स.)।
केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश (सीयूएचपी) ने नए शैक्षणिक सत्र से अनेक नए एवं रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल ने कहा कि इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, बहु-विषयक एवं कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना है, ताकि वे राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप है और क्षेत्रीय आवश्यकताओं तथा रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर की गई है। प्रो. बंसल ने बताया कि विश्वविद्यालय में इस सत्र से एलएल.एम. पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जिसे विद्यार्थियों का खूब समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि उच्च स्तरीय विधि शिक्षा की मांग लगातार बढ़ रही है। बी.कॉम. एलएलबी एवं बीबीए एलएलबी जैसे एकीकृत विधि पाठ्यक्रम भी बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से अंतिम स्वीकृति प्राप्त होते ही प्रारंभ कर दिए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों से विद्यार्थियों को विधि, प्रबंधन एवं वाणिज्य का समन्वित ज्ञान प्राप्त होगा, जिससे वे न्यायपालिका, कॉर्पोरेट क्षेत्र, विधिक परामर्श, प्रशासन एवं विभिन्न सरकारी एवं निजी संस्थानों में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे। कुलपति ने कहा कि विधि शिक्षा को समाज से जोड़ने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में लीगल एड क्लिनिक भी स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से स्थानीय समुदाय तथा विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के लोगों को कानूनी जागरूकता, उनके अधिकारों की जानकारी एवं प्रारंभिक कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
चीनी भाषा और बौद्ध अध्ययन के पाठ्यक्रम भी शुरू
प्रो. बंसल ने बताया कि विश्वविद्यालय ने चीनी भाषा (चाइनीज) का पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बदलते परिदृश्य में चीनी भाषा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति ने भी विश्वविद्यालयों में चीनी भाषा के अध्ययन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया है। इस पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों को विदेश नीति, व्यापार, पर्यटन, अनुवाद, शोध एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि धर्मशाला निर्वासित तिब्बती सरकार का मुख्यालय होने के कारण विश्वभर में विशेष पहचान रखता है। इसी विशेषता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने बौद्ध अध्ययन तथा तिब्बती अध्ययन के नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों से बौद्ध दर्शन, संस्कृति, इतिहास, तिब्बती भाषा एवं सभ्यता के अध्ययन और शोध को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने भू-विज्ञान (जियोलॉजी) तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) एवं रिमोट सेंसिंग के पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए हैं। इन विषयों का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, भूस्खलन अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधन विकास, आधारभूत संरचना निर्माण तथा वैज्ञानिक योजना निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कुलपति ने बताया कि पर्यटन राज्य होने के कारण विश्वविद्यालय ने होटल प्रबंधन का पाठ्यक्रम भी इस सत्र से प्रारंभ किया है।
प्रो. बंसल ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे दक्ष, जिम्मेदार और सामाजिक सरोकारों से जुड़े युवा तैयार करना है जो राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी समय की मांग और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप नए एवं नवाचार आधारित पाठ्यक्रम प्रारंभ करता रहेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया