जीएसटी 2.0 सुधार भारत के लिए वरदान एवं राष्ट्रीय एकता का सूत्र : प्रो. बंसल
धर्मशाला, 06 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से “जीएसटी 2.0 सुधार : विकसित भारत 2047 की ओर एमएसएमई और उद्यमिता की व्यावसायिक क्षमता को उजागर करने” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविदों, कर विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों हिस्सा ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. (डॉ.) सत प्रकाश बंसल ने जीएसटी को भारत के आर्थिक एकीकरण का सशक्त माध्यम तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी केवल एक कर सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, आर्थिक समरसता एवं सहकारी संघवाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को साकार करते हुए जीएसटी ने व्यापारिक सुगमता, पारदर्शिता और राजस्व संग्रहण को सुदृढ़ किया है। साथ ही यह उद्यमिता को बढ़ावा देने, एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने तथा समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संगोष्ठी के आधार व्याख्यान में सीए कुमार गौरव धवन, आयुक्त, केंद्रीय जीएसटी, जालंधर ने जीएसटी के कार्यान्वयन से भारतीय अर्थव्यवस्था में आए सकारात्मक परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जीएसटी ने कर अनुपालन में सुधार, कर आधार के विस्तार तथा डिजिटल शासन को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जीएसटी भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण कर सुधारों में से एक
अपने मुख्य वक्तव्य में भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान के 73वें अध्यक्ष सीए चरणजोत सिंह नंदा ने कहा कि जीएसटी भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण कर सुधारों में से एक है, जिसने देश को एकीकृत राष्ट्रीय बाजार के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 के माध्यम से अनुपालन को और सरल, पारदर्शी तथा व्यवसाय-अनुकूल बनाने की आवश्यकता है, जिससे विशेष रूप से एमएसएमई और नवोदित उद्यमियों को लाभ मिल सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर प्रणाली को नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी और सुशासन के साथ जोड़ना आवश्यक है।
इस अवसर पर वाणिज्य विभाग द्वारा क्षेत्र के प्रतिष्ठित प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं अकाउंटिंग पेशेवरों को सम्मानित किया गया।
विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी संयोजक प्रो. मोहिंदर सिंह ने कहा कि उद्योग-जगत और शिक्षण संस्थानों के मध्य सहयोग विद्यार्थियों को वास्तविक व्यावसायिक परिवेश से जोड़ने तथा उनके कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संगोष्ठी के दौरान जीएसटी सुधारों के विविध आयामों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से एक विशेष पैनल परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों एवं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से आए शोधकर्ता, शिक्षक एवं विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। संगोष्ठी के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत शोध पत्रों के माध्यम से जीएसटी सुधारों की उपलब्धियों, चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया