सीयू के पुस्तकालय में एआई आधारित सेवाओं के संभावित उपयोग पर हुई चर्चा
धर्मशाला, 17 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला में विश्वविद्यालय पुस्तकालय सलाहकार समिति की बैठक में विश्वविद्यालय पुस्तकालय से संबंधित विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित उक्त बैठक में विश्वविद्यालय के बढ़ते शोध आउटपुट, नवाचार एवं अकादमिक गतिविधियों में पुस्तकालय की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की तथा शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों को बेहतर संसाधन, डिजिटल सामग्री एवं सूचना सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उक्त बैठक के दौरान समिति सदस्यों ने पुस्तकालय में एआई आधारित सेवाओं के संभावित उपयोग तथा शोध एवं नैतिकता से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वहीं पुस्तकालय को नए देहरा परिसर में स्थानांतरित करने के हेतु भी विस्तार से चर्चा की गई।
वहीं विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. विक्रम शर्मा ने कहा कि पुस्तकालय टीम गुणवत्तापूर्ण पुस्तकालय एवं सूचना सेवाएं प्रदान करने तथा विश्वविद्यालय की शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को और अधिक मजबूत करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
वहीं उक्त बैठक के प्रमुख एजेंडे में देहरा स्थित विश्वविद्यालय के नवनिर्मित स्थायी परिसर में केंद्रीय पुस्तकालय की स्थापना, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रिंट एवं डिजिटल संसाधनों की खरीद, वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट आवंटन, पुस्तकालय एवं सूचना सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग, शोध एवं नैतिकता संबंधी नीतियों तथा पुस्तकालय में स्टाफ की व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। कुलपति प्रो. बंसल ने शोध आधारित विश्वविद्यालय के निर्माण में आधुनिक, गतिशील एवं प्रभावी पुस्तकालय एवं सूचना सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।उन्होंने विश्वविद्यालय के शोध, नवाचार एवं अकादमिक वातावरण को सुदृढ़ करने के लिए पुस्तकालय टीम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
समिति सदस्य प्रो रोशन लाल शर्मा, निदेशक अनुसन्धान प्रो. प्रदीप नायर, अधिष्ठाता प्रो दीपांकर शर्मा एवं अन्य सदस्यों ने इस विषय पर पुस्तकालय द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रसंशा की। वहीं कुलपति ने कहा कि लगभग तीन वर्षों में पुस्तकालय एवं इससे सम्बंधित सेवाओं में कायापलट करने वाला बदलाव आया है। इसके पश्चात विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों पर चर्चा की गई। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय ने सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन के माध्यम से शोध एवं अकादमिक सेवाओं से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलों को अपनाया है। विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं शोध-पर्यवेक्षक शोधचक्र पहल से जुड़े हुए हैं।
शोध प्रकाशनों में हुई उल्लेखनीय वृद्धि
विश्वविद्यालय के शोध प्रकाशनों में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 में शोध प्रकाशनों की संख्या 6 थी, जो वर्ष 2021 में 118, वर्ष 2022 में 163, वर्ष 2023 में 223, वर्ष 2024 में 356 तथा वर्ष 2025 में बढ़कर 421 तक पहुंच गई। अब कुल सार्वजनिक संख्या 1992 है। विश्वविद्यालय का एच-इंडेक्स 76 तक पहुंचना शोध की गुणवत्ता एवं प्रभाव में निरंतर हो रही प्रगति को दर्शाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया