केंद्रीय विवि में 4 से 6 अप्रैल तक होगा अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

 


धर्मशाला, 01 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 4 से 6 अप्रैल तक किया जा रहा है। कार्यशाला का विषय “हिमालय होराइजन्स : टेक्टोनिक्स, सस्टेनेबिलिटी, और रेजिलियंस—1905 के कांगड़ा भूकंप से आज तक” रखा गया है। यह जानकारी सीयू के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में दी।

उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला 1905 के ऐतिहासिक कांगड़ा भूकंप की स्मृति में आयोजित की जा रही है जो उत्तर-पश्चिमी हिमालय में घटित सबसे विनाशकारी भूकंपीय घटनाओं में से एक था। साथ ही यह क्षेत्र में बढ़ते आपदा जोखिमों से संबंधित समकालीन चुनौतियों का भी समाधान करती है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हिमाचल प्रदेश भर में चरम मौसमी घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से 2023 और 2025 के मानसून के मौसमों के दौरान हुए विनाशकारी भूस्खलन, जिनके कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ, बुनियादी ढांचे को क्षति पंहुची और पर्यावरण का क्षरण हुआ। इन घटनाओं ने हिमालयी भूभाग में वैज्ञानिक मूल्यांकन, खतरा-क्षेत्र निर्धारण और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे की योजना बनाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है।

कुलपति ने बताया कि यह कार्यशाला प्रो. ए.के. महाजन के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। प्रो. महाजन विभाग के प्रमुख होने के साथ-साथ रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस केंद्र के निदेशक भी हैं।

उन्होंने डीडीएमए और एसडीएमए के सहयोग से राज्य में भूस्खलन की जांच और शमन उपायों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी तथा शिमला क्षेत्र के लिए 'माइक्रोज़ोनेशन' मानचित्र विकसित किए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया