दो सितंबर तक ओपीएस बहाल नहीं हुई तो विधानसभा कूच करेंगे बिजली बोर्ड कर्मचारी
धर्मशाला, 26 अगस्त (हि.स.)।
हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी संघ ने प्रदेश सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर जल्द पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल नही किया गया तो कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे। बुधवार को धर्मशाला में संघ के प्रदेश अध्यक्ष नितीश भारद्वाज ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर दो सितंबर से पहले बिजली बोर्ड कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल नहीं की गई तो प्रदेशभर के हजारों कर्मचारी विधानसभा की ओर कूच कर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
नितीश भारद्वाज ने कहा कि पांच अगस्त से प्रदेशभर में कर्मचारी सम्मेलन और सभाएं कर आंदोलन की रूपरेखा से कर्मचारियों को अवगत करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले अपने घोषणा पत्र में कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने का वादा किया था। प्रदेश के करीब 1.40 लाख कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ मिल चुका है, लेकिन बिजली बोर्ड के करीब नौ हजार कर्मचारी अभी भी इससे वंचित हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े तीन महीने से यूनियन लगातार सरकार के साथ इस मुद्दे पर वार्ता कर रही है। मुख्यमंत्री की ओर से भी पुरानी पेंशन बहाली को लेकर आश्वासन दिए गए, लेकिन अभी तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई। इससे कर्मचारियों में रोष है।
21 दिन का दिया था नोटिस
यूनियन अध्यक्ष ने बताया कि पांच अगस्त को बिजली बोर्ड प्रबंधन के माध्यम से सरकार को 21 दिन का नोटिस दिया गया था। इसके बाद 19 अगस्त को राज्य पदाधिकारियों की आपात बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि दो सितंबर से पहले ओपीएस बहाल नहीं होने पर बिजली बोर्ड कर्मचारी विधानसभा की ओर कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड कर्मचारियों की ओपीएस संबंधी राशि को लेकर भी सरकार और प्रबंधन के समक्ष प्रस्ताव रखा गया है। उनके अनुसार, एनएसडीएल के पास बिजली बोर्ड कर्मचारियों का करीब 330 करोड़ है, जबकि करीब नौ हजार कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने की देनदारी लगभग 12 करोड़ रुपये बताई गई है। यूनियन ने सरकार और बिजली बोर्ड प्रबंधन को एक प्रारूप भी सौंपा है, जिसमें कर्मचारियों के भविष्य के लिए न्यास बनाने का सुझाव दिया गया है।
ओपीएस बहाली मुख्य मांग
भारद्वाज ने कहा कि बिजली बोर्ड ने 1972 के सीसीएस पेंशन नियमों को वर्ष 1974 में लागू किया था। बाद में एचआरटीसी जैसे निगमों में भी पेंशन व्यवस्था लागू की गई। ऐसे में बिजली बोर्ड कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से वंचित रखना समझ से परे है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनियन की मुख्य मांग पुरानी पेंशन की बहाली है। इसके अलावा कर्मचारियों की नौ अन्य मांगें भी हैं, जिन पर सरकार से अलग से बातचीत की जा सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया