अंक और ग्रेड विद्यार्थी की योग्यता का पैमाना नहीं : डॉ राजेश शर्मा

 


धर्मशाला, 18 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने वर्तमान परीक्षा परिणामों के दौर में विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाते हुए एक बेहद संवेदनशील और प्रेरणादायक संदेश साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंक और ग्रेड किसी विद्यार्थी की योग्यता का पैमाना तो हो सकते हैं, लेकिन वे उसके संपूर्ण जीवन का भविष्य तय नहीं करते। शनिवार को जारी एक प्रेस बयान में डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे परिणामों को केवल सीखने की एक प्रक्रिया के रूप में देखें और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए भविष्य के नए लक्ष्य निर्धारित करने पर ध्यान केंद्रित करें।

असफलता से न डरें, इसे सुधार का अवसर मानें

विद्यार्थियों को मानसिक संबल प्रदान करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारने का एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे किसी भी स्थिति में मानसिक दबाव या निराशा के वशीभूत होकर कोई भी गलत कदम न उठाएं। उन्होंने संवाद की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि जब भी मन में दुविधा या निराशा हो, तो अपने अभिभावकों, शिक्षकों और मित्रों से खुलकर बात करें। जीवन में धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास ही वह त्रिकोणीय आधार है, जिस पर सफलता की भव्य इमारत खड़ी होती है।

विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बोर्ड की प्रतिबद्धता

डॉ. शर्मा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड केवल परीक्षाएं संचालित करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि वह प्रत्येक विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति में बोर्ड विद्यार्थियों के साथ खड़ा है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनसे सीखें और अपने सपनों को जीवंत रखें।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया