हिमाचल बोर्ड परीक्षाओं में अब केस स्टडी आधारित सवालों से होगी छात्रों की क्षमता की परख

 


धर्मशाला, 17 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राज्य की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने की घोषणा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के विजन को धरातल पर उतारते हुए, बोर्ड ने फैसला लिया है कि मार्च 2027 से होने वाली परीक्षाओं में छात्रों को सिर्फ रटे-रटाए ज्ञान के आधार पर नहीं परखा जाएगा। इसके बजाय, उनके तार्किक चिंतन और विश्लेषणात्मक क्षमता का आकलन करने के लिए प्रश्न-पत्रों में 'केस स्टडी' आधारित प्रश्नों को शामिल किया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने शुक्रवार को इस अहम बदलाव की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब हर विषय के प्रश्न-पत्र में दो केस स्टडी आधारित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाएंगे। इन सवालों में वास्तविक जीवन की परिस्थितियों या किसी विशेष संदर्भ का एक पूरा विवरण (सिचुएशन) दिया जाएगा। छात्रों को उस परिस्थिति का विश्लेषण कर अपने ज्ञान, समझ और तार्किक क्षमता के आधार पर सटीक उत्तर देने होंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्र विषय को सिर्फ तथ्यों के रूप में याद न रखें, बल्कि उसे समझें और व्यावहारिक जीवन में लागू करना सीखें।

रटने की प्रवृत्ति से मिलेगी मुक्ति, विकसित होगी निर्णय लेने की क्षमता

वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में शिक्षा को केवल रटने की प्रवृत्ति से बाहर निकालकर समस्या-समाधान और निर्णय लेने की क्षमता तक ले जाना समय की सबसे बड़ी मांग है। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग है। केस स्टडी वाले प्रश्न छात्रों को किताबी दुनिया से निकालकर वास्तविक जीवन की स्थितियों से जोड़ेंगे। इससे उनमें आलोचनात्मक चिंतन और किसी भी विषय को गहराई से समझने का दृष्टिकोण विकसित होगा।

शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग, बदलेगा पेपर सेट करने का तरीका

इस बड़े बदलाव को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए शिक्षा बोर्ड ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। बोर्ड अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रश्न-पत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया को आधुनिक शैक्षिक मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया जा रहा है। चूंकि यह परीक्षा प्रणाली छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए नई होगी, इसलिए स्कूलों और शिक्षकों को भी विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। बोर्ड की ओर से समय-समय पर जरूरी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा ताकि शिक्षक अपने विद्यार्थियों को इस दक्षता-आधारित परीक्षा प्रणाली के लिए पूरी तरह तैयार कर सकें।

हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड का यह कदम परीक्षा प्रणाली को अधिक विद्यार्थी-केंद्रित और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। यह बदलाव न केवल छात्रों को उच्च शिक्षा और कड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत बनाएगा, बल्कि उन्हें असल जिंदगी की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए भी तैयार करेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया