हिमाचल में ड्यूल बोर्ड परीक्षा व्यवस्था से 10वीं का संयुक्त परिणाम पंहुचा 89.54 प्रतिशत, बोर्ड की पहल से बचा छात्रों का साल

 


धर्मशाला, 26 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बुधवार को जुलाई माह में आयोजित मैट्रिक द्वितीय परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया। परीक्षा परिणाम 60.27 प्रतिशत रहा। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि उनकी छात्रहित में शुरू की गई मैट्रिक ड्यूल बोर्ड परीक्षा व्यवस्था सफल साबित हुई है। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था के कारण हजारों विद्यार्थियों का कीमती साल बर्बाद होने से बचा है। मार्च 2026 से लागू की गई इस प्रणाली के फलस्वरूप मुख्य एवं द्वितीय परीक्षा का संयुक्त उत्तीर्ण प्रतिशत अब बढ़कर 89.54 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो बोर्ड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को तनावमुक्त वातावरण प्रदान करना तथा उन्हें बिना एक वर्ष गंवाए अपने परिणाम में सुधार का अवसर देना है। उन्होंने संयुक्त परिणाम के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि मुख्य एवं द्वितीय परीक्षा को मिलाकर कुल 91,060 परीक्षार्थियों में से 81,110 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं।

दूसरी परीक्षा में 60.27 प्रतिशत विद्यार्थी पास

डॉ. शर्मा ने बताया कि जुलाई 2026 में आवश्यक सुधार, कम्पार्टमेंट, वैकल्पिक सुधार एवं अतिरिक्त विषयों के लिए आयोजित मैट्रिक द्वितीय परीक्षा में कुल 8,181 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें से 4,930 विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है, जिससे इस परीक्षा का उत्तीर्ण प्रतिशत 60.27 प्रतिशत रहा।

इसके अलावा 1,774 विद्यार्थी कम्पार्टमेंट तथा 1,316 विद्यार्थी आवश्यक पुनरावृत्ति की श्रेणी में रहे। परीक्षार्थी अपना परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.hpbose.org पर ऑनलाइन देख सकते हैं।

आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देते हुए डॉ. शर्मा के निर्देशानुसार प्रमाण-पत्रों की प्रतियां डिजीलॉकर पर भी उपलब्ध करवाई गई हैं, ताकि विद्यार्थियों को आगे के दाखिले एवं अन्य शैक्षणिक कार्यों में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

पुनर्मूल्यांकन एवं पुनः जांच के लिए 9 सितंबर तक आवेदन

बोर्ड अध्यक्ष ने जानकारी दी कि जो परीक्षार्थी अपनी उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं हैं, वे पुनर्मूल्यांकन अथवा पुनः जांच के लिए 9 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए प्रति विषय पुनर्मूल्यांकन शुल्क 1,000 तथा पुनः जांच शुल्क 800 निर्धारित किया गया है। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि आवेदन केवल संबंधित विद्यालय के माध्यम से ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे। बिना शुल्क के भेजे गए अथवा सीधे ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया