सेवानिवृत्त लेक्चरर की मेहनत लाई रंग, कांगड़ा में पहली बार तैयार हुआ ड्रैगन फ्रूट का जैम

 




धर्मशाला, 19 अगस्त (हि.स.)। उद्यान विभाग, कांगड़ा के निरंतर प्रोत्साहन से कांगड़ा और ऊना के किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उच्च-मूल्य वाली फल फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

कांगड़ा और ऊना जिलों में ड्रैगन फ्रूट की खेती तेजी से बेहतर विकल्प के रूप में उभर रही है। सेवानिवृत्त लेक्चरर जीवन सिंह राणा और उनके पुत्र आशीष सिंह राणा ने प्राकृतिक खेती पद्धति से ड्रैगन फ्रूट की सफल खेती, प्रवर्धन और प्रसंस्करण कर मिसाल कायम की है।

गुणवत्तापूर्ण ड्रैगन फ्रूट जहां बाजार में अच्छे दाम पर बिक जाता है, वहीं छोटे आकार और अतिरिक्त उपज के विपणन में किसानों को परेशानी होती है। इस समस्या के समाधान के लिए उद्यान विभाग किसानों को प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन के लिए प्रेरित कर रहा है। इसी कड़ी में नगरोटा बगवां स्थित फल डिब्बाबंदी इकाई में पहली बार प्राकृतिक ड्रैगन फ्रूट से जैम तैयार किया गया। जीवन सिंह राणा ने अपनी उपज से करीब 23 किलोग्राम जैम तैयार किया।

राणा परिवार ने शुरुआत में करीब 500 पौधों से प्रयोग शुरू किया था। आज 35 कनाल क्षेत्र में लगभग 5,000 पौधों तक इसका विस्तार हो चुका है। उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में जीवन सिंह राणा ने प्रदेश की पहली पंजीकृत ड्रैगन फ्रूट नर्सरी भी स्थापित की है।

प्रदेश सरकार मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत उच्च-मूल्य वाली फसलों के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता दे रही है। 50 प्रतिशत सब्सिडी योजना के तहत किसान ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो, ब्लूबेरी, कीवी और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों की खेती कर सकते हैं।

संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. कमल शील नेगी और विषय विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार नेगी ने राणा परिवार को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया