अब किसान आईडी के बिना नहीं मिलेगी खाद, जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल करना भी अनिवार्य

 

धर्मशाला, 28 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में रबी सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को भविष्य में खाद लेने से पहले केंद्र सरकार के एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कराकर अपनी कृषि भूमि का रिकॉर्ड डिजिटल करवाना होगा। किसान आईडी बनने के बाद इसी में दर्ज जमीन के आधार पर खाद का कोटा व उर्वरक की मात्रा तय होगी।

कृषि उपनिदेशक कांगड़ा डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि जिन किसानों ने अभी तक अपनी जमीन का रिकॉर्ड एग्रीस्टैक पोर्टल पर दर्ज नहीं कराया है, उन्हें जल्द पंजीकरण करवाना होगा। ऐसा नहीं करने पर भविष्य में डिपो से खाद लेने में उन्हें परेशानी हो सकती है। किसान आईडी बनवाने के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर कृषि भूमि का पूरा विवरण दर्ज करना होगा। इसके लिए खसरा-खतौनी नंबर और जमीन से जुड़ी अन्य जानकारी देनी होगी। जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल होने के बाद उसे किसान की डिजिटल आईडी से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने बताया कि किसान नज़दीकी लोक मित्र केंद्र में जाकर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, आधार नम्बर से लिंक्ड मोबाइल तथा अपनी ज़मीन का रिकॉर्ड यानी पर्चा साथ लाना होगा। यह पंजीकरण निःशुल्क होगा।

उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना है कि किसान को उसकी वास्तविक कृषि भूमि के अनुपात में ही उर्वरक मिले। इसके अलावा, खाद की अनियमित खरीद और वितरण की भी निगरानी हो सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया