बीमा कंपनी को दावा खारिज करना पड़ा मंहगा, उपभोक्ता आयोग ने 17.49 लाख मुआवजा देने का सुनाया फैसला

 

धर्मशाला, 24 मार्च (हि.स.)। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग चंबा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज किए जाने को गलत ठहराते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया है। आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता को 17,49,500 रुपये मुआवजा देने के साथ 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और अन्य खर्च भी अदा करने के आदेश दिए हैं।

मामले के अनुसार गांव घरोह निवासी मंगनी राम ने अपने डंपर (एचपी-73ए-7069) का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। 3 फरवरी 2023 को बीमा अवधि के दौरान वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे उसे भारी नुकसान हुआ। घटना के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई गई और बीमा कंपनी ने सर्वेयर के माध्यम से नुकसान का आकलन भी करवाया।

हालांकि, बीमा कंपनी ने 20 नवंबर 2023 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय चालक शराब के नशे में था। कंपनी ने इस दावे के समर्थन में आरएफएसएल रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें चालक के खून में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक बताई गई।

शिकायतकर्ता ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए आयोग में शिकायत दायर की। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि आरएफएसएल रिपोर्ट और बीमा कंपनी के दस्तावेजों में चालक के नाम को लेकर गंभीर विसंगतियां हैं। रिपोर्ट में विवेक ठाकुर का उल्लेख है, जबकि बीमा दस्तावेजों और ड्राइविंग लाइसेंस में चालक का नाम विवेक सिंह दर्ज है। इसके अलावा, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि खून का नमूना वास्तव में किस व्यक्ति का लिया गया था।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि केवल संदिग्ध रिपोर्ट के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं है। बीमा कंपनी द्वारा पर्याप्त और स्पष्ट साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे यह साबित हो सके कि दुर्घटना के समय वास्तविक चालक नशे में था।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया