बीमा कंपनी को उपभोक्ता आयोग का झटका, इलाज का दावा खारिज करना पड़ा महंगा

 

धर्मशाला, 29 जुलाई (हि.स.)।

जिला उपभोक्ता विवाद आयोग कांगड़ा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए बीमा धारक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को उपचार पर खर्च किए गए 58,729 रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने, 20 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे तथा 15 हजार रुपये वाद खर्च का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने शिकायत स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को फटकार लगाते हुए उक्त अहम फैसला सुनाया है। परिवादी गुरदीप सिंह ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, जिसका लगातार नवीनीकरण कराया जाता रहा। अगस्त 2023 में उनके पुत्र अगम कहलोन की तबीयत बिगड़ने पर पहले उसे जोनल अस्पताल धर्मशाला में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों की सलाह पर सिटी अस्पताल मटौर में भर्ती किया गया, जहां 12 से 17 अगस्त तक उपचार चला। इलाज पर कुल 58,729 रुपये खर्च हुए, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं थी। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि मरीज का उपचार बाह्य रोगी के रूप में किया जा सकता था और अस्पताल में भर्ती करना चिकित्सकीय रूप से आवश्यक नहीं था।

वहीं, आयोग ने रिकॉर्ड पर मौजूद चिकित्सकीय दस्तावेजों और उपचार करने वाले डॉक्टर के प्रमाणपत्र का अवलोकन करने के बाद पाया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए अस्पताल में भर्ती कर उपचार देना आवश्यक था। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यह तय करना बीमा कंपनी की मेडिकल टीम का अधिकार नहीं है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाए या नहीं। यह निर्णय उपचार कर रहे चिकित्सक का होता है। ऐसे में बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार करना अवैध है और यह सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया