पारंपरिक धुम्मू शाह मेले की पहचान और सांस्कृतिक महत्व को खत्म कर रही कांग्रेस : सुधीर शर्मा
धर्मशाला, 10 अप्रैल (हि.स.)। धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने ऐतिहासिक धुम्मू शाह मेला, दाड़ी के वर्तमान स्वरूप पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा इस पारंपरिक मेले को ट्रेड फेयर के रूप में परिवर्तित कर इसकी मूल पहचान और सांस्कृतिक महत्व को समाप्त करने का कार्य किया गया है, जो स्थानीय जनता की भावनाओं के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि धुम्मू शाह मेला क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रहा है। यह मेला केवल व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक समरसता, लोक संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण रहा है। वर्षों से स्थानीय लोग, छोटे व्यापारी और श्रद्धालु इस मेले में बढ़-चढ़कर भाग लेते रहे हैं, जिससे इसकी एक विशिष्ट पहचान बनी हुई थी।
सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने इस मेले का पूर्णतः व्यापारीकरण कर दिया है। मेले की नीलामी कर इसे ठेके पर देना न केवल परंपराओं के विरुद्ध है, बल्कि इससे छोटे व्यापारियों और स्थानीय दुकानदारों का आर्थिक शोषण भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि मेले में स्टॉल लगाने के लिए अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे आम व्यापारी इस आयोजन से दूर होते जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यह स्थिति जनहित के विपरीत है और इससे मेले का मूल उद्देश्य समाप्त हो रहा है। सरकार को चाहिए था कि वह इस सांस्कृतिक आयोजन को संरक्षित और प्रोत्साहित करती, लेकिन इसके विपरीत इसे राजस्व कमाने का माध्यम बना दिया गया है।
विधायक सुधीर शर्मा ने स्पष्ट किया कि आने वाली भाजपा सरकार इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों के व्यापारीकरण को पूरी तरह समाप्त करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर धुम्मू शाह मेले सहित प्रदेश के सभी पारंपरिक मेलों को उनकी मूल भावना और स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जाएगा, ताकि आम जनता, स्थानीय कलाकारों और छोटे व्यापारियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि मेले की नीलामी प्रक्रिया और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया गया, तो इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी।
सुधीर शर्मा ने कहा कि भाजपा सदैव प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं और जनभावनाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में किसी भी सांस्कृतिक आयोजन की गरिमा और उसकी मूल पहचान से समझौता नहीं किया जाएगा तथा जनता के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया