न्याय, समानता और विधि का शासन भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला : राज्यपाल

 


धर्मशाला, 15 जून (हि.स.)। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने सोमवार को राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में भारत सरकार के न्याय विभाग द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला एवं सुधार उत्सव के अवसर पर ‘न्याय प्रबोध, अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला न्याय, समानता और विधि के शासन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की गरिमा तथा न्याय तक समान पहुंच की भी गारंटी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि न्याय का अर्थ केवल न्यायालयों से निर्णय प्राप्त करना नहीं है, बल्कि ऐसा समाज स्थापित करना है जहां प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।

हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के अनेक क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम हैं, जहां नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाना चुनौतिपूर्ण है। ऐसे में, तकनीक आधारित समाधान, डिजिटल प्लेटफॉर्म, विधिक जागरूकता अभियान तथा स्थानीय सहायता तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने कहा कि दिशा जैसी अभिनव पहल के माध्यम से न्याय को नागरिकों के द्वार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। टेली-लॉ, न्याय बंधु तथा विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम न्याय को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि टेली-लॉॉ कार्यक्रम ने दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विधिक परामर्श प्राप्त करना अत्यंत सरल बना दिया है।

भारत सरकार के न्याय विभाग द्वारा प्रारंभ किए गए ‘न्याय प्रबोध, अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विधिक जागरूकता ही न्याय तक पहुंच का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है जब युवा जागरूक, उत्तरदायी, संवेदनशील तथा कानून के प्रति सम्मान रखने वाले नागरिक बनें।

राष्ट्र सेवा में एक-दूसरे की पूरक हैं कार्यपालिका और न्यायपालिका : मेघवाल

इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों संविधान से अपनी शक्ति प्राप्त करती हैं तथा राष्ट्र सेवा में एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि देश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि कॉमन सर्विस सेंटर तथा टेली-लॉ जैसी पहलें उन लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई हैं, जिन्हें भौगोलिक अथवा आर्थिक कारणों से न्यायालयों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। इन माध्यमों से नागरिक अपनी कानूनी समस्याओं को विशेषज्ञ अधिवक्ताओं के समक्ष रख सकते हैं तथा निःशुल्क कानूनी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। इस व्यवस्था के अंतर्गत अधिवक्ताओं की फीस भारत सरकार द्वारा वहन की जाती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न्याय सुलभ हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने 1,725 ऐसे कानूनों को समाप्त किया अथवा उनमें संशोधन किया, जो अप्रासंगिक हो चुके थे। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में सबसे बड़ा परिवर्तन उसकी सोच में आया है। अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानूनों का उद्देश्य भारतीयों को दंडित करना था, जबकि वर्तमान सरकार का उद्देश्य नागरिकों को न्याय प्रदान करना है।

इस अवसर पर भारत सरकार के न्याय विभाग द्वारा दिशा योजना के अंतर्गत ‘न्याय प्रबोध, अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के दौरान टेली-लॉ सेवा के लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस पहल से प्राप्त लाभों की जानकारी दी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया