सुधीर शर्मा के समर्थन में सड़कों पर उतरी भाजपा, राज्यपाल और मुख्य सचिव को भेजे ज्ञापन

 




धर्मशाला, 10 अगस्त (हि.स.)। धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता ने सोमवार को एकजुट होकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। भाजपा धर्मशाला मंडल की ओर से राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में सुधीर शर्मा से संबंधित विजिलेंस और धर्मशाला पुलिस थाना में दर्ज दो एफआईआर को लेकर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग की गई।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कार्यकर्ताओं ने कहा कि धर्मशाला की जनता अपने निर्वाचित विधायक के साथ मजबूती से खड़ी है। कांग्रेस सरकार यह समझ ले कि एफआईआर और पुलिस कार्रवाई के भय से न तो विपक्ष की आवाज दबेगी और न ही जनता के मुद्दे उठने बंद होंगे। भाजपा ने मांग की है कि दोनों एफआईआर में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों का वस्तुनिष्ठ परीक्षण किया जाए तथा यह भी जांचा जाए कि एफआईआर दर्ज कराने अथवा जांच प्रभावित करने में किसी राजनीतिक, प्रशासनिक या बाहरी व्यक्ति का दबाव अथवा हस्तक्षेप तो नहीं रहा।

कार्यकर्ताओं ने चेताया कि राजनीतिक लड़ाई राजनीतिक मैदान में लड़ी जाए, पुलिस थानों और एफआईआर के सहारे नहीं। धर्मशाला की जनता लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी प्रकार का प्रहार स्वीकार नहीं करेगी और सुधीर शर्मा के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका से जुड़े हर कदम का लोकतांत्रिक तरीके से मजबूती से विरोध करेगी।

सुधीर शर्मा ने लॉ ऑफिसर्स की भूमिका पर भी उठाए सवाल

इसी बीच विधायक सुधीर शर्मा ने राज्यपाल को अलग से दिए अपने प्रतिवेदन में प्रदेश के कुछ सेवारत राज्य विधि अधिकारियों की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रतिवेदन में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हिमाचल प्रदेश कांग्रेस लीगल सेल के बैनर तले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व ऐसे पदाधिकारी ने किया जो साथ ही प्रदेश सरकार में एडिशनल एडवोकेट जनरल का सार्वजनिक पद भी संभाल रहे हैं, जबकि इसमें अन्य सेवारत एडिशनल एडवोकेट जनरल और डिप्टी एडवोकेट जनरल के शामिल होने की भी बात कही गई है। शर्मा ने इसे राज्य के विधि अधिकारियों की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बताते हुए राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग की है।

सुधीर शर्मा ने राज्यपाल से राज्य सरकार से तत्काल रिपोर्ट मांगने, सेवारत एडिशनल एडवोकेट जनरल और डिप्टी एडवोकेट जनरल की राजनीतिक दल की गतिविधियों में भागीदारी उनके नियुक्ति नियमों और सरकारी नीति के अनुरूप है या नहीं इसकी जांच कराने तथा राज्य के विधि अधिकारियों के कार्यालय की स्वतंत्रता और तटस्थता बनाए रखने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने यही मामला मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार के समक्ष भी उठाया है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया