मुख्यमंत्री बताएं धर्मशाला के लिए कौन सी नई और बड़ी परियोजना लेकर आए : सुधीर शर्मा
धर्मशाला, 16 अक्टूबर (हि.स.)। पूर्व मंत्री एवं धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के धर्मशाला दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पूर्व सरकारों के कार्यकाल में स्वीकृत बजट और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ रहे कार्यों का शिलान्यास कर राजनीतिक श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं। सुधीर शर्मा ने कहा कि धर्मशाला में आइस स्केटिंग रिंक और रोलर स्केटिंग रिंक के लिए बजट का प्रावधान उनके मंत्री रहते हुए तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में किया गया था। ऐसे में मुख्यमंत्री का इन परियोजनाओं का शिलान्यास कर श्रेय लेने का प्रयास उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि वर्तमान कार्यकाल में धर्मशाला के लिए कौन-सी नई और बड़ी विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
सुधीर शर्मा ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के दिए बयान पर पलटवार करते हुए पूछा कि देहरा में निर्माणाधीन केंद्रीय विश्वविद्यालय के बिजली और पानी के खर्च का वहन कौन कर रहा है? उन्होंने मुख्यमंत्री से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के पास अपने लिए आलीशान कार्यालय बनाने, हेलीकॉप्टर और प्राइवेट जेट से यात्राओं पर खर्च करने के लिए धन उपलब्ध है, लेकिन धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों को गति देने के लिए पैसे नहीं हैं।
बस अड्डे व आईटी पार्क के विकास कार्यों की अनदेखी
सुधीर शर्मा ने धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में निर्माणाधीन बस अड्डे और चेतड़ू में बने आईटी पार्क की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के लिए उनके कार्यकाल में बजट का प्रावधान किया गया था, लेकिन आज बस अड्डे की स्थिति दयनीय बनी हुई है और चेतड़ू आईटी पार्क पर ताला लटका हुआ है। इससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं।
धर्मशाला-मैक्लोडगंज सड़क और बाहल पुल की स्थिति चिंताजनक
सुधीर शर्मा ने धर्मशाला-मैक्लोडगंज सड़क की खस्ताहाल स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सड़क पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी दशा सुधारने के लिए सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने सराह गांव से बाहल गांव को जोड़ने वाले पुल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पुल बह जाने के बावजूद इसके पुनर्निर्माण को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि इसके लिए नाबार्ड के माध्यम से बजट का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि इन कार्यों में देरी से आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया