मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटें बढ़ाने की घोषणा महज राजनीति : विपिन सिंह परमार
धर्मशाला, 09 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार की नाकामियों की आए दिन नई नई खबरें आ रही हैं। एक तरफ अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रमों के नाम पर करोड़ों रुपये की डीपीआर तैयार की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर बजट का कोई प्रावधान नहीं है, वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटें बढ़ाने के नाम पर महज घोषणाओं की राजनीति की जा रही है। इन दोनों मामलों ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश की सरकार केवल कागजों और फाइलों में ही विकास दिखा रही है, जबकि धरातल पर हालात बद से बदतर हो चुके हैं। यह आरोप वीरवार को विपिन सिंह परमार ने जारी एक प्रेस बयान में प्रदेश कांग्रेस सरकार पर लगाए।
भाजपा नेता ने कहा कि साढ़े तीन वर्षों में कांग्रेस सरकार ने हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्रदेश की जनता हर वर्ग में त्रस्त है। चाहे किसान हो, युवा हो, कर्मचारी हो या व्यापारी। सरकार की नीतियां पूरी तरह से दिशाहीन और जनविरोधी साबित हुई हैं।
मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटें बढ़ाने की घोषणा पर विपिन सिंह परमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह भी सिर्फ एक “जुमला” बनकर रह जाएगा। उन्होंने कहा कि जब मौजूदा संस्थानों में स्टाफ, उपकरण और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, तो सीटें बढ़ाने की बात करना जनता को गुमराह करने के अलावा कुछ नहीं है। सरकार पहले यह बताए कि क्या सभी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ की कमी पूरी हो चुकी है। क्या अस्पतालों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगर नहीं, तो ये घोषणाएं किस आधार पर की जा रही हैं।
परमार ने आरोप लगाया कि हमला करते हुए कहा कि प्रदेश में एक व्यक्ति की सरकार चल रही है। मुख्यमंत्री पूरी तरह तानाशाही रवैया अपनाते हुए सभी निर्णय खुद ही ले रहे हैं। न तो कैबिनेट मंत्रियों की राय ली जाती है और न ही विधायकों की बात सुनी जाती है। इससे सरकार के भीतर भी असंतोष की स्थिति है और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
विपिन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह डगमगा दिया है। कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, विकास कार्य ठप पड़े हैं, और सरकारी योजनाएं केवल फाइलों में सीमित होकर रह गई हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया