गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में हिमाचल ने बनाई देश में मजबूत पहचान : देवेन्द्र जग्गी

 


धर्मशाला, 17 अप्रैल (हि.स.)। गुणात्मक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश ने एक बार फिर देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। नैशनल एचीवमेंट टेस्ट-2025 में प्रदेश ने देशभर में 5वां स्थान प्राप्त किया है, जबकि वर्ष 2021 में यह स्थान 21वां था। प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए इस वर्ष के बजट में 9,660 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

यह विचार धर्मशाला के बीएड काॅलेज में आयोजित वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे धर्मशाला के पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी ने व्यक्त किए।

देवेन्द्र जग्गी ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक और सकारात्मक बदलाव किए जा रहे हैं। सभी शिक्षण संस्थानों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षा को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित करना, राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूलों की स्थापना तथा स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न लागू करना जैसे निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

उन्होंने कहा कि छात्र जीवन व्यक्ति के भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान किया गया परिश्रम ही उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है। प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। शिक्षा से ही सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी ने बीएड काॅलेज धर्मशाला की चारदीवारी निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा भी की।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया