टीबी से लड़ने में पंचायतों की भूमिका अहम : एडीसी
धर्मशाला, 11 जून (हि.स.)।कांगड़ा जिला में क्षय रोग (टीबी) के खिलाफ लड़ाई में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामुदायिक सहयोग, जनजागरूकता और समय पर उपचार के माध्यम से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में जिला कांगड़ा की 287 पंचायतों को टीबी मुक्त पंचायत घोषित किया गया, जिनमें 69 पंचायतों ने सिल्वर तथा 37 पंचायतों ने गोल्ड श्रेणी प्राप्त की। यह उपलब्धि कांगड़ा को प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल करती है। यह बात एडीसी कांगड़ा विनय कुमार ने गुरुवार को उपायुक्त कार्यालय में आयोजित जिला क्षय रोग मंच, जिला क्षय रोग उन्मूलन समिति तथा को-माॅर्बिडिटी समिति की संयुक्त बहु-क्षेत्रीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में जिला कांगड़ा में कुल 2,807 टीबी रोगी दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2026 में जनवरी से मई तक 1,180 नए टीबी रोगियों की पहचान की जा चुकी है। इस अवसर पर उन्होंने टीबी मुक्त भारत ऐप तथा खुशी एआई चैटबाॅट का शुभारंभ करते हुए इनके व्यापक उपयोग पर बल दिया और सभी टीबी रोगियों को ऐप से जोड़ने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. विवेक करोल ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के तहत पिछले 80 दिनों में जिले में 225 आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 13,350 लोगों ने भाग लिया। अभियान के दौरान 33,900 एक्स-रे किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिले के 969 उच्च जोखिम वाले गांवों में से अब तक 205 गांवों को कवर किया जा चुका है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आर.के. सूद ने बताया कि जिले में 44 ट्रूनैट तथा 38 सीबी-नैट माॅड्यूल कार्यरत हैं। वर्ष 2026 में अब तक ट्रूनैट मशीनों के माध्यम से 21,610 जांचें की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी से मई 2026 तक 1,340 लोगों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) प्रदान किया गया है तथा जिले का टीपीटी कवरेज 96 प्रतिशत रहा है, जो राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया